जेएलएफ में द पोएट्री ऑफ रिमेंबरेंस सत्र में डॉ मालाश्री लाल और जगदीप सिंह के बीच संवाद
जयपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) बैठक में 'द पोएट्री ऑफ़ रिमेंबरेंस' पर एक सत्र का आयोजन हुआ। बीकानेर के गवर्नमेंट डूंगर कॉलेज में अंग्रेज़ी की विभाध्यक्ष रहीं स्वर्गीय डॉ. दिव्या जोशी के जीवन और साहित्यिक विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस सत्र के माध्यम से प्रसिद्ध विद्वान, कवयित्री, अनुवादक और शिक्षिका डॉ. दिव्या जोशी को याद किया गया, जिसका संचालन जयपुर के इंडो-इंग्लिश कवि जगदीप सिंह ने किया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व अंग्रेज़ी प्रोफेसर एवं कवयित्री डॉ. मालाश्री लाल से संवाद किया।
इस सेशन में कविता और साहित्य में स्मृतियों की प्रासंगिकता पर पर रोचक संवाद हुआ। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि यादें, क्षति और निरंतरता किस प्रकार व्यक्तिगत और सामूहिक इतिहास में काव्यात्मक अभिव्यक्ति को आकार देते हैं। इस सत्र में डॉ. दिव्या जोशी के कविता संग्रह ‘मैत्रयोश्का से कविता का पाठ भी किया।
चर्चा के दौरान कविताओं को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखा गया जो मन को शांति देती है और घावों को भरने में मदद करती है। इसमें यह भी बताया गया कि समय के साथ स्मृतियां बदलती रहती हैं। कवि शोक और दुःख से अलग-अलग तरीकों से जूझते हैं, कहीं शांत स्वीकार, कहीं लगातार याद और चाह, तो कहीं जानबूझकर दर्द को संजो कर रखना। विभाजन की कथाओं, स्मृति और शोकगीत परंपराओं के संदर्भ से यह बात सामने आई कि यादें केवल व्यक्तिगत अनुभव से नहीं, बल्कि सामूहिक इतिहास से भी आकार लेती हैं।
इस अवसर पर डॉ. मलाश्री लाल ने अपने नवीनतम कविता संग्रह 'साइनिंग इन द एयर' से स्मृति पर आधारित कविताएं पढ़ीं, जबकि जगदीप सिंह ने अपनी एन्थोलॉजी ‘माय एपिटॉफ’ से कविता पाठ किया। इन रचनाओं ने मिलकर स्मृति, क्षति और निरंतरता पर केंद्रित एक संवेदनशील साहित्यिक वातावरण रचा।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

