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जेडीए की जमीन पर संचालित निजी स्कूल सीज : अरबों की जमीन पर था अतिक्रमण

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जेडीए की जमीन पर संचालित निजी स्कूल सीज : अरबों की जमीन पर था अतिक्रमण


जोधपुर, 21 जनवरी (हि.स.)। जोधपुर विकास प्राधिकरण ने बुधवार को गंगाणा रोड स्थित ग्राम चौखा में बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए की बेशकीमती सरकारी जमीन के एक हिस्से को अतिक्रमण मुक्त कर करवा लिया है। जेडीए के प्रवर्तन दस्ते ने भारी पुलिस लवाजमे के साथ मौके पर पहुंचकर वहां संचालित निजी स्कूल ब्लू हेवन पब्लिक स्कूल के भवन को अपने कब्जे में ले लिया। हालांकि, इसी 11 बीघा जमीन पर ही चल रहे मदरसे वाले हिस्से पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जेडीए टीम ने स्कूल के मुख्य द्वार और सभी कमरों पर अपने ताले जड़ दिए और मुख्य गेट पर यह संपत्ति जोधपुर विकास प्राधिकरण की है का नोटिस चस्पा कर दिया।

जेडीए की टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां स्कूल का कुछ स्टाफ मौजूद था। पुलिस बल की मदद से सबसे पहले स्टाफ को बाहर निकाला गया। इसके बाद अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर स्कूल के प्रत्येक कमरे की बारीकी से तलाशी ली ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सीलिंग की कार्रवाई के दौरान कोई व्यक्ति या बच्चा भीतर न फंस जाए। पूरी तसल्ली करने के बाद जेडीए ने भवन को सीज कर दिया। जेडीए द्वारा चस्पा की गई सूचना में स्पष्ट लिखा गया है- यह संपत्ति जोधपुर विकास प्राधिकरण की है, अनाधिकृत रूप से कोई प्रवेश नहीं करें।

शिक्षा विभाग पहले ही रद्द कर चुका है मान्यता :

जेडीए की इस कार्रवाई से कुछ दिन पहले ही शिक्षा विभाग ने भी ब्लू हेवन पब्लिक स्कूल के खिलाफ बड़ा कदम उठाया था। विभाग ने नियमों की अवहेलना और स्वामित्व विवाद के चलते स्कूल की मान्यता रद्द कर दी थी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में करीब 166 स्टूडेंट्स पंजीकृत थे। शिक्षा विभाग ने इन सभी बच्चों के परिजनों को सूचित करना शुरू कर दिया है कि वे अपने बच्चों की टीसी ले सकते हैं, ताकि उनका दाखिला किसी अन्य स्कूल में कराया जा सके। चूंकि मान्यता रद्द होने के कारण बुधवार को स्कूल में कोई विद्यार्थी मौजूद नहीं था, इसलिए जेडीए को कार्रवाई में विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।

यह है पूरा मामला :

यह पूरा मामला ग्राम चौखा के खसरा संख्या 699 से जुड़ा है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह करीब 11 बीघा (1.7725 हेक्टेयर) जमीन तत्कालीन नगर सुधार न्यास (अब जेडीए) के नाम दर्ज है। जुलाई 2025 में यह मामला तब सुर्खियों में आया था, जब भाजपा के पूर्व पार्षद और मंडल अध्यक्ष शैलेंद्र भंडारी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शिकायत भेजी थी। शिकायत में बताया गया था कि सरकारी जमीन पर कब्जा करके डॉ. अब्दुल वहीद कोटा मेमोरियल दारूल उलूम अहले हदीस मदरसा और स्कूल का संचालन किया जा रहा है, साथ ही दुकानें भी बना ली गई हैं। शिकायत के बाद मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा, जहां से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद जेडीए की नींद टूटी। जेडीए के न्यायालय प्राधिकृत अधिकारी ने 18 जून 2025 को ही आदेश जारी कर मदरसा संचालक को अतिक्रमी घोषित कर दिया था।

संस्था का दावा और कोर्ट का स्टे :

दूसरी तरफ, मदरसा संचालन संस्था का दावा था कि यह जमीन उन्हें मौखिक रूप से वक्फ (दान) की गई थी और वे 1990 से पहले से यहां काबिज हैं। संस्था ने यह भी तर्क दिया था कि 2018 में उन्हें कोर्ट से स्टे मिला था, जिसे बाद में नियमन के आश्वासन पर 2022 में विड्रॉ कर लिया गया था। हालांकि, जेडीए ने नियमों का हवाला देते हुए अंतत: इस अवैध कब्जे को हटा दिया। जेडीए सूत्रों के अनुसार संस्था रेवेन्यू बोर्ड द्वारा स्टे बताया जा रहा है, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच से जेडीए के पक्ष में आदेश हो चुका था। ऐसे में जेडीए की ओर से की गई कार्रवाई कानूनी रूप से उचित है।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश