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सीसी सड़क में जेडीए की गुणवत्ता खा गए अधिकारी-ठेकेदार, 60 लाख के काम के लिए अधिकारियों ने स्वीकृत करवाए 1.37 करोड़

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सीसी सड़क में जेडीए की गुणवत्ता खा गए अधिकारी-ठेकेदार, 60 लाख के काम के लिए अधिकारियों ने स्वीकृत करवाए 1.37 करोड़


जयपुर, 25 अगस्त (हि.स.)।

जयपुर विकास प्राधिकरण

महाराणा प्रताप मार्ग पर हाईटेंशन लाइन से रंगोली गार्डन तक सीसी सड़क बनाने का काम कर रहा है। इस काम में जेडीए अधिकारियों की आंखों के सामने अंधेरे का पर्दा डालकर भ्रष्टाचार करने में जुटा है। घटिया काम का परिणाम आमजन को आने वाले समय में गड्ढों वाली सड़क पर हिचकोलों के रुप में झेलना पड़ेगा। इस काम पर करीब 60 लाख रुपए खर्च किया जाना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जेडीए पृथ्वीराज नगर (उत्तर) में आमजन को जलभराव और गड्ढों से मुक्ति देने के लिए महाराणा प्रताप मार्ग को सीसी सड़क का निर्माण करवा रहा है। तकनीकी कमियों और खामियों पर पर्दा डालने के लिए जेडीए के इंजीनियरों की देखरेख में रात के अंधेरे में ठेकेदार सीमेंट की सड़क का निर्माण करवा दिया। तकनीकी नियमों के अनुसार, इतनी लागत और श्रेणी की सड़क का निर्माण आधुनिक पेवर मशीन से किया जाना अनिवार्य था लेकिन रात के अंधेरे में कराए गए इस निर्माण में न तो पेवर मशीन का उपयोग हुआ और ना ही अनुभवी कुशल कारीगरों का। जेडीए के अधिकारियों ने नौसिखिए मजदूरों के सहारे घटिया सामग्री फैलाकर सड़क तैयार करवा दी। इतना ही नहीं, स्वीकृत डिजाइन और मानकों के अनुसार सड़क की मोटाई 12 इंच रखी जानी थी, लेकिन मौके पर अधिकारियों की सांठगांठ से इसे घटाकर केवल 8 इंच ही किया गया। खास बात यह है ठेकेदार ने जेडीए अधिकारियों से मिलीभगत कर रोड़ी-मोरम बिछाकर उस पर सीसी सड़क का निर्माण कर दिया गया।

जोन एक्सईएन हिमांशु गुप्ता का कहना है कि फिलहाल 300 मीटर सड़क का निर्माण किया गया है, जबकि दूसरे हिस्से का काम किया जाना है। सीसी सड़क निर्माण से पूर्व पीसीसी करने की बात को लेकर अधिकारी ने चुप्पी साध ली। यहां पर सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। ऐसे में दूसरे तरफ के हिस्से का काम सीवर लाइन डालने के बाद किया जाएगा। बजट 1 करोड़ से अधिक , काम दिया 60 लाख का जेडीए ने इस सड़क के लिए 1.37 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। टेंडर में यह काम तय दर से 35 फीसदी नीचे चला गया। यह काम 35 फीसदी कम रेट पर अनोक देवी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा है। इस सड़क का निर्माण महज 60 लाख रुपये में आसानी से हो सकता था, लेकिन उसके लिए जेडीए अधिकारियों ने 1.37 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत करवा लिया गया। बजट स्वीकृत होने के बाद भी कई दिनों तक पेवर मशीन नहीं मिलने का बहाना बनाकर काम बंद रखा गया।

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के दौरान ही सामने आ गई थी। जी-शिड्यूल तैयार करते समय इसमें ऐसे कड़े और भारी-भरकम स्पेसिफिकेशन शामिल किए गए, जैसे निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के किसी मुख्य एक्सप्रेसवे का होना चाहिए। जानकारों का कहना है कि यह शर्तें केवल इसलिए जोड़ी गईं ताकि स्थानीय और छोटे ठेकेदार इस निविदा प्रक्रिया में भाग ही न ले सकें और चहेते ठेकेदार को मनमाने बजट पर काम सौंपा जा सके। सीवर लाइन में देरी और आधा-अधूरा निर्माण इस पूरे प्रोजेक्ट में योजनाबद्ध कार्यप्रणाली का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। महाराणा प्रताप मार्ग पर सीवर लाइन डालने का कार्य हर हाल में जून महीने तक पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन जेडीए और संबंधित एजेंसी की सुस्ती के चलते सीवर का काम अब तक अधूरा है। इसके बावजूद आनन-फानन में आधी सड़क का निर्माण पूरा कर दिया गया। अब स्थिति यह है कि बची हुई आधी सड़क सीवर लाइन डलने के बाद बनाई जाएगी, जिससे आगे फिर से तोड़-फोड़ और बजट की बर्बादी होना तय है।

जलभराव सहित अन्य समस्याओं से आमजन बेहाल

रंगोली गार्डन और महाराणा प्रताप मार्ग से सटी दर्जनों आवासीय कॉलोनियों में रहने वाली जनता पिछले कई महीनों से उड़ती धूल, जलभराव, जगह-जगह खुदे गड्ढों और आए दिन लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से त्रस्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जेडीए को आमजन की समस्याओं का स्थाई समाधान करना था जबकि वे खुद भ्रष्टाचार करने में लगे है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश