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जयपुर में निजी वाहनों को किराये पर देना प्रतिबंधित, बिना लाइसेंस रेंटल फर्मों पर होगी कार्रवाई

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जयपुर में निजी वाहनों को किराये पर देना प्रतिबंधित, बिना लाइसेंस रेंटल फर्मों पर होगी कार्रवाई


जयपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। जयपुर पुलिस ने निजी वाहनों को किराये पर देने और बिना वैध लाइसेंस व परमिट के वाहन रेंट पर चलाने वालों के खिलाफ सख्ती की है। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) अजय सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। आदेश 11 अक्टूबर से 9 दिसंबर 2026 तक जयपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में लागू रहेगा।

आदेश के अनुसार निजी वाहनों को किराये पर देना प्रतिबंधित रहेगा। वाहन किराये पर देने वाली फर्मों और व्यक्तियों के पास वैध लाइसेंस और आवश्यक परमिट होना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार जयपुर में कुछ फर्मों और व्यक्तियों की ओर से बिना लाइसेंस वाहन किराये पर उपलब्ध कराने की जानकारी सामने आई है। ऐसे वाहनों का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में होने की आशंका को देखते हुए यह आदेश जारी किया गया है।

आदेश में केंद्र सरकार की ‘रेंट ए कैब स्कीम, 1989’ के प्रावधानों की पालना अनिवार्य की गई है। लाइसेंस के बिना कोई भी फर्म या व्यक्ति वाहन किराये पर नहीं दे सकेगा। लाइसेंस पांच वर्ष के लिए वैध होगा और उसका समय पर नवीनीकरण कराना होगा। किराये पर दिए जाने वाले वाहनों के पास मोटर वाहन अधिनियम की धारा 88 के तहत आवश्यक परमिट होना भी जरूरी है। वाहन किराये पर देने वाले केंद्रों के पास कम से कम एक चालू टेलीफोन नंबर होना चाहिए, जो 24 घंटे उपलब्ध रहे। पूरे दस्तावेजों के बिना या अनफिट वाहनों को किराये पर देना प्रतिबंधित रहेगा।

वाहन देने से पहले ग्राहक का संपर्क नंबर, पूरा पता और वैध पहचान दस्तावेजों का सत्यापन करना होगा। वाहन में यात्रा करने वाले अन्य लोगों के नाम और पहचान संबंधी दस्तावेज भी लेने होंगे। किराया केंद्रों को एक रजिस्टर में वाहन, चालक और यात्रियों के नाम-पते, यात्रा की अवधि, उद्देश्य और गंतव्य का विवरण दर्ज करना होगा। यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध या अवैध गतिविधि में लिप्त दिखाई देता है, तो इसकी सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने या पुलिस नियंत्रण कक्ष को देनी होगी।

आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, फर्म या कंपनी के प्रबंधकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 9 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश से निरस्त होने तक प्रभावी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश