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जयपुर डायलॉग्स के तीन दिवसीय वैचारिक महाकुंभ में अस्सी से अधिक वक्ता लेंगे भाग

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जयपुर डायलॉग्स के तीन दिवसीय वैचारिक महाकुंभ में अस्सी से अधिक वक्ता लेंगे भाग


जयपुर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। देश के प्रमुख वैचारिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक मंच ‘द जयपुर डायलॉग्स’ का 11वां वार्षिक सम्मेलन तीस अक्टूबर से एक नवंबर तक जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित होटल क्लार्क आमेर में आयोजित होगा। ‘धर्मयुद्ध : द बैटल फॉर भारत’ विषय पर होने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के 80 से अधिक प्रख्यात वक्ता, रक्षा विश्लेषक, विधि विशेषज्ञ, इतिहासकार, मीडिया प्रतिनिधि और नीति-निर्माता भारत के भविष्य, राष्ट्रीय सुरक्षा, न्याय व्यवस्था, संस्कृति और वैचारिक विमर्श से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा करेंगे। सम्मेलन के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है और अतिथि वक्ताओं का जयपुर पहुंचना शुरू हो गया है।

जयपुर डायलॉग्स के संस्थापक अध्यक्ष, पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह और लेखक संजय दीक्षित ने बताया कि वार्षिक सम्मेलन का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक पहचान, वैचारिक स्वायत्तता और सभ्यतागत विरासत से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा करना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और आंतरिक वैचारिक संघर्षों के बीच ‘धर्मयुद्ध : द बैटल फॉर भारत’ केवल सम्मेलन की थीम नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, वैचारिक संप्रभुता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान से जुड़ा विमर्श है। सम्मेलन में औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और देश के सामने मौजूद आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों के समाधान पर चर्चा की जाएगी।

दीक्षित के अनुसार यह आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति से लेकर न्यायिक सुधार, मीडिया की विश्वसनीयता और सभ्यतागत अधिकारों तक विभिन्न विषयों पर खुली चर्चा का मंच बनेगा। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय विमर्श में भारत के दृष्टिकोण को प्रमुखता देना और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाना है।

सम्मेलन का उद्घाटन 30 अक्टूबर को कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर करेंगे। उद्घाटन सत्र का विषय ‘भारत राइजिंग—व्हाई भारत मस्ट राइज एंड व्हाई इट वाज इन स्लंबर?’ होगा। इस सत्र का संचालन संजय दीक्षित करेंगे। इसमें भारत के विकास, सभ्यतागत चेतना और वैश्विक भूमिका से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।

सम्मेलन में न्याय व्यवस्था, संविधान और सभ्यतागत अधिकारों पर केंद्रित सत्र भी होंगे। ‘मिलॉर्ड्स एंड फ्यूचर ऑफ जुडिशरी इन इंडिया’ सत्र में वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया और संजय दीक्षित विचार रखेंगे। इसी दौरान ‘हिंदू लीगल एड’ वेबसाइट का शुभारंभ भी प्रस्तावित है।

विदेश नीति और रक्षा से जुड़े सत्रों में दक्षिण एशिया की कूटनीतिक परिस्थितियों, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हालात, ब्रिक्स और जी-7 के बीच वैश्विक समीकरणों तथा आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर चर्चा होगी। ब्रह्मोस मिसाइल से लेकर ड्रोन तकनीक तक भारत की रक्षा क्षमताओं से जुड़े विषय भी विमर्श का हिस्सा होंगे। इन सत्रों में मेजर जनरल राजीव नारायणन, लेफ्टिनेंट जनरल डी.पी. पांडे, मेजर गौरव आर्या, सुशांत सरीन और तिलक देवशर सहित कई विशेषज्ञ शामिल होंगे।

इसके अलावा मीडिया, सोशल मीडिया और वैचारिक विमर्श से जुड़े सत्रों में पारंपरिक मीडिया और डिजिटल मंचों की भूमिका, सूचना के प्रसार तथा राष्ट्रहित में डिजिटल माध्यमों के प्रभाव पर चर्चा होगी। इन सत्रों में आनंद रंगनाथन, रुबिका लियाकत, आनंद नरसिम्हन, अमन चोपड़ा, सुशांत सिन्हा और प्रखर श्रीवास्तव सहित कई वक्ता भाग लेंगे।

भारतीय संस्कृति, सिनेमा और इतिहास से जुड़े सत्रों में बॉलीवुड की दिशा, इतिहास लेखन, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक तथ्यों की व्याख्या जैसे विषय उठाए जाएंगे। इनमें शेफाली वैद्य, अद्वैता काला, संजीव नेवार, संक्रांत सानू, अमी गणात्रा और डॉ. सी.के. राजू सहित अन्य वक्ता अपने विचार रखेंगे।

संजय दीक्षित ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य मंच के 12, ओपन माइक के 17 और गोलमेज चर्चा के 17 सत्रों सहित करीब 50 सत्र आयोजित किए जाएंगे। विभिन्न कार्यक्रम होटल परिसर में मुख्य सभागार, समूह चर्चा स्थलों, ओपन माइक मंच और टेंट परिसर में होंगे। आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और विभिन्न क्षेत्रों के वक्ताओं तथा अतिथियों के आगमन का सिलसिला जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश