जयपुर बम ब्लास्ट मामला : अट्ठारह साल बाद भी जिंदा है दर्द, दहशत
जयपुर, 13 मई (हि.स.)। 13 मई 2008 की वह भयावह शाम आज भी गुलाबी शहर के लोगों के जेहन में जिंदा है। शाम 7:20 बजे से 7:36 बजे के बीच परकोटे के 8 अलग-अलग स्थानों पर हुए सिलसिलेवार बम धमाकों ने पूरे शहर को दहला दिया था। इन धमाकों में 71 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 185 से अधिक लोग घायल हुए थे। 18 साल बाद भी पीड़ित परिवार उस दर्द को नहीं भूल पाए हैं।
पहला धमाका माणक चौक क्षेत्र में हुआ, जिसके बाद त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़, चांदपोल हनुमान मंदिर, जौहरी बाजार और सांगानेरी गेट समेत कई स्थानों पर लगातार विस्फोट हुए। बमों में अमोनियम नाइट्रेट और लोहे के छर्रे भरे गए थे, जिन्हें साइकिलों पर रखकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगाया गया था। चांदपोल हनुमान मंदिर के बाहर हुए धमाके में सबसे अधिक 25 लोगों की मौत हुई थी।
जानकारी के अनुसार ब्लास्ट पीड़ित परिवारों का दर्द आज भी ताजा है। चांदपोल हनुमान मंदिर धमाके में गंभीर रूप से घायल हुईं सुशीला साहू करीब पांच साल तक कोमा में रहीं। उनकी पुत्रवधु अनुपमा ने बताया कि 12वीं की परीक्षा के बाद नए सपनों के साथ ससुराल आई थीं, लेकिन धमाकों ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।
उन्होंने बताया कि सुशीला साहू सिर्फ परिवार की मुखिया नहीं थीं, बल्कि पूरे घर की आत्मा थीं। धमाके में उनके सिर में छह छर्रे घुस गए थे। एसएमएस अस्पताल का वह मंजर आज भी आंखों के सामने है, जहां हर तरफ घायल, चीख-पुकार और लाशें थीं। परिवार ने उन्हें उनकी साड़ी के रंग से पहचाना था। तीन ऑपरेशन के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और वे कोमा में चली गईं। आखिरकार 29 अप्रैल 2013 को उनका निधन हो गया।
परिवार के अनुसार सुशीला साहू की बीमारी ने पूरे घर की जिंदगी बदल दी। उनके पति राजेंद्र साहू ने घर को अस्पताल बना दिया। मशीनों और दवाइयों के बीच परिवार ने संघर्ष जारी रखा। इस दौरान बच्चों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और परिवार एकजुट बना रहा। छोटे बेटे पीयूष ने डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया और आज अजमेर के जेएलएन अस्पताल में न्यूरोसर्जन हैं।
धमाकों के दौरान छोटी चौपड़ पर ड्यूटी कर रहे होमगार्ड विजेंद्र शर्मा भी घायल हुए थे। उनके शरीर में छर्रे लगे, लेकिन उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम जारी रखा। इस हादसे में उनके साथी जवान भारत भूषण और दीपक यादव शहीद हो गए थे।
धमाकों के बाद राजस्थान एटीएस की जांच में भारतीय मुजाहिदीन का नाम सामने आया था। मामले में कई आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। दिसंबर 2019 में जयपुर की विशेष अदालत ने चार आरोपितों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन वर्ष 2023 में राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच को त्रुटिपूर्ण बताते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया। इसके बाद राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, जहां मामला अभी लंबित है।
वहीं जिंदा बम मिलने के एक अन्य मामले में विशेष अदालत ने चार आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जिसे आरोपितों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। फिलहाल उन्हें वहां से राहत नहीं मिली है।
18 साल बाद भी परकोटे की कई दीवारों, बाजारों और लोगों के दिलों में उस काली शाम के निशान मौजूद हैं। जयपुर फिर से अपनी रफ्तार पकड़ चुका है, लेकिन 13 मई 2008 का दर्द आज भी हर साल लोगों की आंखें नम कर देता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

