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स्वान के हमले से जख्मी डेढ़ माह के सांवरा ने हारी जिंदगी से जंग

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स्वान के हमले से जख्मी डेढ़ माह के सांवरा ने हारी जिंदगी से जंग


-गांव की झोपड़ी में घुस कर स्ट्रीट डॉग बाइट का दुर्लभ मामला

अजमेर, 28 अप्रेल(हि.स.)। अजमेर जिले के 40 किलोमीटर दूर पीसांगन कस्बे में स्थित कालेसरा गांव की एक झोपड़ी में पांच दिन पहले गली के कुत्ते के हमले से बुरी तरह जख्मी डेढ़ माह के मासूम शिशु सांवरा की मंगलवार सुबह मौत हो गई। कुत्ते के हमले से शिशु की आंतें पेट से बाहर आ गई थीं और अन्य आर्गन डैमेज हो गए थे।

जेएलएन हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के सीनियर डॉक्टर लखन पोसवाल ने बताया कि बच्चों के डाक्टरों की टीम ने बच्चे का आपरेशन किया था। बच्चे को पूरी निगरानी में रखा जा रहा था। बच्चे को पल्स फील नहीं हो रही थी। ब्लड प्रेशर इतना कम हो गया था कि रिकॉर्ड तक नहीं हो पा रहा था। हाथ पैर बिल्कुल ठंडे पड़ गए थे। दोनों किडनी कम काम कर रही थी। इसके चलते यूरिन नहीं आ रहा था। बच्चे को उपयुक्त इलाज देकर ठीक करने का प्रयास किया जा रहा था कि गत रात उसकी धड़कन रुक गई। उसे सीपीआर देकर रिवाइव किया गया किन्तु उसे बचाया नहीं जा सका।

जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अनिल सामरिया ने बताया था कि बच्चे की स्थिति गंभीर और नाजुक बनी हुई तो थी ही। वह कोमा में था और वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा जा रहा था। मेडिकल बोर्ड का गठन कर डॉ गरिमा अरोड़ा के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई 24 घंटे बच्चे की निगरानी कर रही थी, किन्तु बच्चे को बचाया नहीं जा सका।

डॉ गरिमा अरोड़ा ने बताया कि यह रेयर केस था। 15 साल में पहली बार अजमेर में ऐसा डॉग बाइट का मामला देखने को मिला, जो काफी भयानक था। डॉ गरिमा ने बताया कि बच्चे के पेट की लेयर पूरी तरह से फट चुकी थी। आंतें बाहर आ गई थी। बाद में सर्जरी कर आंतें अंदर डाल कर पेट को कवर किया गया था।

गौरतलब है कि पीड़ित मासूम सांवरा पर झोपड़ी में घुस कर जब कुत्ते ने हमला किया तो उसकी चीख सुनकर उसकी मां 30 वर्षीय केलम झोपड़ी में पहुंची तो उसने पाया था कि उसके बेटे सांवरा को एक कुत्ते ने अपने मुंह में दबोच रखा है। उसने कुत्ते के जबड़े से बच्चे को बचाने के लिए 5 मिनट तक संघर्ष किया और उससे छुड़ा कर कुत्ते के बाहर भागने तक उस पर लेट गई। केलम का कहना रहा कि इस दौरान उसका दूसरा बेटा जिसे उसने कंबल उड़ाकर सुलाया था वह कुत्ते की नजर से बच गया। बच्चों का पिता काम पर गया हुआ था। उसे सूचित किया गया तो वे गांव से ही किराए की गाड़ी लेकर बच्चे को अजमेर के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां डाक्टरों ने रात में ही प्राथमिक सर्जरी कर बच्चे की जान बचाने की कोशिश की किन्तु वे सफल नहीं हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष