स्मार्ट तकनीक विकसित कर रही आईआईटी जोधपुर की सॉफ्टवेयर नवाचार प्रयोगशाला
स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को मिलेगी मदद, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर
जोधपुर, 20 अगस्त (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जोधपुर की सॉफ्टवेयर नवाचार प्रयोगशाला कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सॉफ्टवेयर संरचना, किनारा संगणना और वस्तु इंटरनेट को एक साथ जोडक़र स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए स्मार्ट तकनीकी समाधान विकसित कर रही है। प्रयोगशाला का उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना है, जो प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर वास्तविक परिस्थितियों में विश्वसनीय, किफायती और बड़े स्तर पर उपयोगी साबित हो।
कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग के सह-आचार्य डॉ. सुमित कालरा के नेतृत्व में संचालित प्रयोगशाला का मुख्य जोर ऐसे सॉफ्टवेयर तंत्र विकसित करने पर है, जिन्हें सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सके। डॉ. कालरा के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता की वास्तविक उपयोगिता केवल स्मार्ट गणनात्मक प्रणालियां विकसित करने में नहीं, बल्कि उन्हें विश्वसनीय, सुलभ और वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग योग्य बनाने में है। प्रयोगशाला ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक जांच सुविधाओं की कमी को ध्यान में रखते हुए पोर्टेबल जांच मंच और स्मार्ट स्वास्थ्य प्रणालियां विकसित कर रही है। इनमें चिकित्सकीय संवेदकों से प्राप्त जानकारी, मरीज के अभिलेख और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इन तकनीकों के माध्यम से बीमारी की शुरुआती पहचान, मरीज के स्वास्थ्य का आकलन और निरंतर निगरानी में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सहायता मिल सकेगी। शोधकर्ता चिकित्सा संस्थानों और आयुर्वेदिक अस्पतालों के साथ मिलकर वास्तविक स्वास्थ्य जरूरतों के अनुरूप इन प्रणालियों को विकसित कर रहे हैं।
प्रयोगशाला का एक प्रमुख शोध क्षेत्र सॉफ्टवेयर संरचना एवं बुद्धिमान प्रणालियां हैं। शोधकर्ता ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुप्रयोग सीमित क्षमता वाले उपकरणों पर भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें। यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहां इंटरनेट की सुविधा लगातार उपलब्ध नहीं रहती। राष्ट्रमंडल शिक्षण सहयोग के साथ विकसित शिक्षक की सहभागिता वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ आधारित शैक्षणिक प्रणाली इसका प्रमुख उदाहरण है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता को शिक्षकों के अनुभव और मानवीय प्रतिक्रिया से जोड़ा गया है। यह प्रणाली भारत, घाना, जिम्बाब्वे, केन्या और नाइजीरिया सहित पांच राष्ट्रमंडल देशों में लागू की जा चुकी है।
प्रयोगशाला का तीसरा प्रमुख क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं वस्तु इंटरनेट का समन्वय है। इसके तहत संवेदक तकनीक, अंतर्निहित प्रणालियों, संकेत प्रसंस्करण, संचार तकनीक और मशीन अधिगम को जोडक़र स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी से जुड़े समाधान विकसित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में आवाज के आधार पर प्रकृति की पहचान, पहनने योग्य संवेदकों के माध्यम से चलने के तरीके का विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जैव-चिकित्सकीय संकेत प्रसंस्करण जैसे शोध किए जा रहे हैं। इनसे स्वास्थ्य संबंधी शुरुआती संकेतों की पहचान और दूरस्थ निगरानी में सहायता मिल सकती है।
प्रयोगशाला का शोध बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तक भी विस्तारित है। संरचनात्मक स्वास्थ्य निगरानी के तहत स्मार्ट संवेदक तंत्र और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों की सहायता से पुलों एवं अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं की स्थिति पर नजर रखने की दिशा में काम किया जा रहा है। संरचनाओं में कमजोरी या खराबी के शुरुआती संकेतों की पहचान होने पर समय रहते मरम्मत और रखरखाव किया जा सकेगा। इससे सार्वजनिक सुरक्षा मजबूत होने के साथ रखरखाव की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है। प्रयोगशाला की विशेषता केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल तैयार करना नहीं है। शोधकर्ता संवेदकों से आंकड़े प्राप्त करने, उन्हें संचार नेटवर्क के माध्यम से भेजने, आंकड़ों का विश्लेषण करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को बेहतर बनाने और पूरी प्रणाली को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने तक की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

