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बाइस साै करोड़ की जमीन पर कब्जा लेने गई हाउसिंग बोर्ड टीम का कब्जेधारियों ने किया विरोध, फेंके पत्थर

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बाइस साै करोड़ की जमीन पर कब्जा लेने गई हाउसिंग बोर्ड टीम का कब्जेधारियों ने किया विरोध, फेंके पत्थर


जयपुर, 16 अप्रैल (हि.स.)। बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक 2200 करोड़ रुपए की 42 बीघा जमीन पर गुरुवार को राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की टीम कब्जा लेने गई थी। कब्जाधारियों ने हाउसिंग बोर्ड टीम का विरोध किया और जेसीबी पर पत्थर फेंके। पथराव में किसी को चोट नहीं आई। हाइकोर्ट के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन ने कब्जा लेने की प्रक्रिया शुरू की थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम गुरुवार को दोपहर 3 बजे मौके पर जेसीबी मशीन लेकर पहुंची थी। यहां जेसीबी मशीन से जमीन पर बनी बाउंड्री वॉल, कोठरियां और अन्य अतिक्रमणों के निर्माण को तोडऩा शुरू किया तो वहां रहने वाले कुछ लोगों ने विरोध जताया और हंगामा कर दिया। इस बीच वहां मौजूद कुछ महिलाओं ने जेसीबी पर कुछ पत्थर फेंक दिए। इससे घबराए हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों ने कुछ समय के लिए कार्रवाई रोक दी। उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा ने बताया कि कार्रवाई के दौरान हाउसिंग बोर्ड की टीम पर पथराव जैसा कुछ नहीं हुआ। किसी को कोई चोट नहीं आई है। टीम ने कार्रवाई कर करीब 20 बीघा जमीन से अतिक्रमण हटाकर अपने कब्जे में ले लिया है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी।

बीटू बाइपास चौराहे से द्रव्यवती नदी तक 42 बीघा से ज्यादा जमीन की हाउसिंग बोर्ड प्रशासन ने वर्ष 1989 में अवाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की थी। वर्ष 1991 में प्रक्रिया पूरी कर ली गई, लेकिन तब कब्जा नहीं लिया गया। इस बीच जमीन पर कुछ भूमाफियाओं ने जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के पट्टे के आधार पर कॉलोनी बसा दी और भूखंड का बेचान दिखा दिया। ये बेचान वर्ष 1981 में जमीन खरीद के आधार पर बताया गया। बताया जा रहा है कि इसमें कई बड़े रसूखात लोगों को भूखंड कौडिय़ों के दाम बेचे गए।

वर्ष 2019 में कॉलोनी के नियमन को लेकर जेडीए ने एनओसी मांगी, लेकिन आवासन मंडल के तत्कालीन आयुक्त ने एनओसी देने से इनकार कर दिया। मंडल ने तर्क दिया कि जब जमीन पर 50 फीसदी निर्माण ही नहीं है तो नियमन क्यों किया जा रहा है? सोसाइटी के खिलाफ एफआई भी दर्ज करवाई गई। मामला एसीबी को भेज दिया गया। ग्राम चैनपुरा एवं दुर्गापुरा की 42 बीघा 10 बिस्वा भूमि के संबंध में जवाहरपुरी गृह निर्माण सहकारी समिति ने सदस्यों के पक्ष में नियमितीकरण की प्रक्रिया जेडीए में प्रारंभ कर दी थी। वर्ष 2019 में हाउसिंग बोर्ड भी जेडीए को इसके नियमितीकरण के लिए एनओसी देने की तैयारी में था, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 5 भूखंडधारियों के मामले में यह निर्देश दिया था कि हाउसिंग बोर्ड द्वारा सिविल न्यायालय में जमा कराई गई मुआवजा राशि बोर्ड को वापस लौटा दी जाए। तब पवन अरोड़ा ने हाउसिंग बोर्ड आयुक्त की जिम्मेदारी संभालते प्रकरण की जांच कर एनओसी रोक दी। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण (अवाप्ति) को निरस्त नहीं किया था। इस आधार पर रिट याचिका भी दायर की गई।

बी-2 बाइपास स्थित श्रीराम कॉलोनी से जुड़ी विवादित करीब 42 बीघा जमीन के मामले में हाईकोर्ट ने हाल ही में हाउसिंग बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया था । कोर्ट ने जेडीए की ओर से 29 मई 1995 को दी गई योजना स्वीकृति और इसके बाद के आदेशों को अवैध माना है। 31 जुलाई 1981 के समझौता विक्रय को भी अवैध मानते हुए शून्य घोषित कर दिया। जस्टिस गणेश राम मीणा ने बोर्ड की याचिका मंजूर कर निजी पक्ष की 3 याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि के अधिग्रहण की कार्रवाई बोर्ड के पक्ष में पूर्ण मानी जाएगी। समझौता विक्रय से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होता। धोखाधड़ी से प्राप्त कोई भी आदेश, भले वह अंतिम रूप ले चुका हो, वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि 12 फरवरी 2002 को एकलपीठ से गलत तथ्यों के आधार पर आदेश प्राप्त किया गया था, इसलिए रद्द किया जाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश