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देश-विदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने समग्र एवं सतत विकास पर किया गहन मंथन

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देश-विदेश के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने समग्र एवं सतत विकास पर किया गहन मंथन


बीकानेर, 30 अप्रैल (हि.स.)। बेसिक पी.जी. कॉलेज एवं महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर द्वारा एक दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों, समाजसेवियों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बीकानेर पश्चिम के विधायक बीकानेर पश्चिम जेठानंद व्यास, विशिष्ट अतिथियों में प्रो. (डॉ.) उज्ज्वल कुमार कल्ला, प्रोफेसर एवं डीन, एनआईटी दिल्ली, डॉ. मंगला, सी-डैक, पंकज ओझा, डॉयचे बैंक, यूएसए, प्रो. (डॉ.) देव अरस्तु पंचारिया, प्रख्यात भौतिक विज्ञानी एवं चिंतक, डॉ. राजेन्द्र कुमार पुरोहित, प्राचार्य, डूंगर कॉलेज, मदन गोपाल व्यास, पूर्व न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय एवं राजेश चुरा, पूर्व गवर्नर, रोटरी क्लब सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

बेसिक पी.जी. कॉलेज, बीकानेर के प्राचार्य एवं कॉन्फ्रेंस के संयोजक डॉ. सुरेश पुरोहित ने अपने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों, विद्वानों एवं प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया और सम्पूर्ण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

उद्घाटन सत्र में विभिन्न अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए शिक्षा, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने युवा पीढ़ी को अनुसंधान, नैतिक मूल्यों एवं सतत विकास की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उद्घाटन सत्र के उपरांत चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें समकालीन विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानवीय मूल्यों के संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यदि शिक्षा में नैतिकता, संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व का समावेश किया जाए, तो यह समाज को एक नई दिशा प्रदान कर सकती है।

द्वितीय सत्र में “विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य एवं कला के माध्यम से सतत विकास” विषय पर आयोजित इस सत्र में प्रो. (डॉ.) राजाराम चोयल की अध्यक्षता में डॉ. पी.एस. वोहरा, डॉ. राजकुमार ठठेरा, चिंतन ओझा (ऑनलाइन) एवं अजयराज आचार्य (ऑनलाइन) ने महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए।

तृतीय सत्र में “पर्यावरणीय स्थिरता एवं जलवायु कार्रवाई” विषय पर आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार छंगानी ने की। इसमें प्रो. (डॉ.) अभिलाषा अल्हा, नीलम थानवी, स्वप्निल हर्ष एवं डॉ. सी.एन. श्रीमाली ने पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

चतुर्थ सत्र में “इतिहास और प्रगति का समन्वय: सामाजिक परिवर्तन एवं समावेशी विकास” विषय पर आयोजित इस सत्र की अध्यक्षता रचना भाटिया ने की। सत्र में डॉ. नितिन गोयल, प्रो. (डॉ.) टी.के. जैन, अविनाश व्यास एवं श्रीराम बिस्सा ने सामाजिक विकास एवं नीति निर्माण पर विचार रखे।

इन सभी सत्रों में देशभर से आए शोधार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिससे ज्ञान-विनिमय एवं अकादमिक संवाद को नई दिशा मिली।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव