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भद्रा और चंद्रग्रहण के बीच देर रात जलेगी होलिका

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भद्रा और चंद्रग्रहण के बीच देर रात जलेगी होलिका


जयपुर, 02 मार्च (हि.स.)। फाल्गुन पूर्णिमा पर होने वाले होलिका दहन को लेकर इस वर्ष तिथि, भद्रा और चंद्रग्रहण के योग ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासा बढ़ा दी है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शास्त्रों में होलिका दहन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा और भद्रा रहित समय में करने का विधान है। इस बार भद्रा रात्रि में रहने से दहन का शुभ समय देर रात निर्धारित हुआ है।

जयपुर की सदियों पुरानी शाही परंपरा के तहत सबसे पहले होलिका दहन सिटी पैलेस जयपुर में होगा। पूर्व राजपरिवार की ओर से विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पहली होली जलाई जाएगी। परंपरा अनुसार पुराने शहर और विभिन्न मोहल्लों के प्रतिनिधि यहां से पवित्र अग्नि (चिंगारी) लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में होलिका दहन करते हैं।

इतिहासकार जितेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के समय हुई थी। वर्तमान में पूर्व राजपरिवार के सदस्य सवाई पद्मनाभ सिंह राजपुरोहितों की मौजूदगी में अनुष्ठान संपन्न करते हैं। दहन के बाद महल के द्वार आमजन के लिए खोल दिए जाते हैं, ताकि श्रद्धालु पवित्र अग्नि के दर्शन और परिक्रमा कर सकें।

ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:56 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च शाम 5:08 बजे तक रहेगी। 2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा होने से होलिका पर्व उसी दिन माना जाएगा। भद्रा 2 मार्च शाम 5:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च सुबह 5:32 बजे तक रहेगी।

शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित है, लेकिन यदि भद्रा निशीथ काल के बाद रहे तो भद्रा पुच्छ में दहन किया जा सकता है। जयपुर सहित अधिकांश स्थानों पर रात 1:26 बजे से 2:38 बजे तक भद्रा पुच्छ में होलिका दहन होगा। भद्रा मुख का समय 2:38 बजे से 4:38 बजे तक रहेगा, जो पूर्णतः वर्जित माना गया है।

शर्मा के अनुसार 3 मार्च को धुलण्डी मनाई जाएगी। इस वर्ष चंद्रग्रहण का योग भी है। सामान्यतः ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक लगता है। इस बार सूर्योदय 6:53 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा। हालांकि धुलण्डी रंगोत्सव है, इसमें धार्मिक अनुष्ठान नहीं होने से सूतक दोष नहीं माना जाएगा।

चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:48 बजे तक रहेगा और मोक्ष 6:48 बजे होगा। ज्योतिषाचार्यों ने सलाह दी है कि रंगोत्सव ग्रहण काल से पहले संपन्न कर लिया जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश