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ग्रीन में ग्रीड, हरित में हरि : डॉ. अनिल मेहता

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ग्रीन में ग्रीड, हरित में हरि : डॉ. अनिल मेहता


उदयपुर, 06 अप्रैल (हि.स.)। भारतीय जीवनदृष्टि से ही पर्यावरण संकट का समाधान संभव : मेहता

विद्या भवन पॉलिटेक्निक के प्राचार्य एवं पर्यावरण चिंतक डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि पर्यावरणीय सुस्थिरता, पारिस्थितिक विवेक और प्रकृति के साथ मानवीय सामंजस्य पर आधारित भारतीय जीवनदृष्टि ही आज विश्व के बढ़ते पर्यावरण संकट का स्थायी समाधान प्रस्तुत कर सकती है। उन्होंने कहा कि पंचमहाभूत भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश के संतुलन तथा पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान पर आधारित भारतीय दृष्टिकोण से ही जैव विविधता का संरक्षण और वैश्विक पर्यावरणीय संतुलन संभव है।

डॉ. मेहता ने ये विचार इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी), नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष शिक्षण सत्र में व्यक्त किए। यह सत्र जनसंचार एवं पत्रकारिता प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया था।

उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान परंपरा पर्यावरण विज्ञान, स्वास्थ्य विज्ञान, मनोविज्ञान, नैतिकता और आध्यात्मिकता को समग्र रूप से समाहित करती है। यह परंपरा मानव और प्रकृति के बीच संतुलित संबंध स्थापित करने का संदेश देती है।

डॉ. मेहता ने बढ़ती पर्यावरणीय आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और पारिस्थितिक असंतुलन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मानवता को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व में बढ़ते युद्ध केवल मानव जीवन ही नहीं बल्कि पर्यावरणीय तंत्र को भी गहरी क्षति पहुंचा रहे हैं, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि इन संकटों का समाधान करुणा और अहिंसा पर आधारित भारतीय वैज्ञानिक पर्यावरण दर्शन, पृथ्वी को माता मानने की संस्कृति तथा पंचमहाभूत आधारित जीवनशैली में निहित है। संसाधनों के संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने ईशोपनिषद के “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा…” सूत्र का उल्लेख करते हुए इसे सर्कुलर बायोइकोनॉमी, जीरो-वेस्ट जीवनशैली और सतत विकास का आधार बताया।

डॉ. मेहता ने कहा कि प्रचलित “ग्रीन” अवधारणा अक्सर उपभोगवादी प्रवृत्तियों को कम नहीं कर पाती, जबकि “हरित” दृष्टिकोण प्रकृति के प्रत्येक तत्व में ‘हरि’ के दर्शन की भावना को स्थापित करता है। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से “हरित” विचारधारा को समाज तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रो. संगीता प्रणवेंद्र और प्रखर अग्रवाल के संयोजकत्व में किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता