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विश्व ब्रह्माण्ड का दिव्य शिवलिंग बीकानेर में, दर्शन कर जीवन धन्य करने का आह्वान

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विश्व ब्रह्माण्ड का दिव्य शिवलिंग बीकानेर में, दर्शन कर जीवन धन्य करने का आह्वान


विश्व ब्रह्माण्ड का दिव्य शिवलिंग बीकानेर में, दर्शन कर जीवन धन्य करने का आह्वान


बीकानेर, 19 मार्च (हि.स.)। छोटीकाशी नाम से जगविख्यात बीकानेर की धरा धन्य हो गयी है। जहां विश्व ब्रह्माण्ड का एकमात्र ऐसा दिव्य शिवलिंग जिस पर आंधप्रदेश के चित्तूर जिले में पूज्यपाद शंकर स्वामीजी ने मात्र जल ग्रहण करते हुए 70 वर्षों तक 10 करोड़ मंत्र जाप से सिद्ध किया। ऐसा शिवलिंग भारत, पृथ्वी पर नहीं है, लेकिन आज बीकानेर की धरती पर पहुंच गया है। करोड़ों जप से सिद्ध करने वाले शंकर स्वामीजी के अंतिम समय में यह शिवलिंग जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज को सुपुर्द किया। कृष्णगिरी शक्ति पीठाधीपति, जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने गुरुवार काे कहा कि भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त इस शिवलिंग का प्रतिदिन विभिन्न द्रव्यों से सायं के सत्र में आठ घंटों तक अभिषेक पूजन होगा। इसके हर बीकानेरवासी दर्शन कर जीवन धन्य कर सकते हैं। इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं श्रद्धानुसार पूरी होती है।

उधर कृष्णगिरी शक्ति पीठाधीपति, जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने गंगाशहर रोड़ के अग्रवाल भवन परिसर में बीकानेर के इतिहास में पहली बार हो रहे अति दिव्य और भव्य विराट चैत्र नवरात्रि विराट स्तर पर वैदिक एवं शास्त्रोक्त नौ कुंडीय महायज्ञ महामहोत्सव के खास मौके पर अपने उद्बोधन में प्रवचन देते हुए वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनियों को बधाई देते हुए हिन्दू नववर्ष-नवसंवत्सर का दिव्य महत्व बताते हुए कहा कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर) की शुरुआत होती है, इसी दिन से प्रकृति, समय और सृष्टि का नया चक्र प्रारंभ माना जाता है।

शास्त्र सम्मत महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि पुराणों के अनुसार इसी दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी इसलिए इसे सृष्टि का पहला दिन माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें नया आरंभ, नई ऊर्जा और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सिखाता है। महामहोत्सव में बीकानेर सहित देश-विदेश से श्रद्धालू पहुंच कर दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से लाभान्वित हो रहे हैं। पूज्य जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने दिवस विशेष पर्व को आध्यात्मिक साधना का समय बताते हुए मंत्र जाप, ध्यान और साधना ये मन और आत्मा को शक्तिशाली बनाते हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम की विजय का आध्यात्मिक संदेश कथा प्रसंग का उल्लेख किया व कहा कि जब भगवान श्रीराम को रावण पर विजय कठिन लग रही थी तब उन्होंने नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर जगत जननी मां ने उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया। वे बोले कि जीवन में कठिनाई आए, शक्ति की साधना और आस्था ही विजय का मार्ग बनाती है।

इससे पूर्व सुबह के सत्र में आयोजन स्थल पर बनाए गए साधना कक्ष में पूज्य जगद्गुरु के सान्निध्य में विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विधिवत् विशेष पूजन-अर्चन किया गया। साथ ही काशी के विद्वान विप्र पंडितों के साथ उपस्थित बीकानेर सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालू भक्तों ने सामूहिक रुप से एक स्वर में 'ऊं हृीं बटुकाय नम:' ॐ माहेश्वराय नमः मंत्रों के जाप को एक स्वर में गूंजायमान किया। आगामी 11 दिनों में विभिन्न बीज मंत्रों के जाप के साथ श्रद्धालूओं को दिए गए पायरेट कुबेर लक्ष्मी यंत्र एवं 1008 जीबू कॉइन की सिद्धि के लिए दिव्य साधना शिविर में जाप किया। साथ ही दोपहर के सत्र में वैदिक शास्त्रोक्त पद्धति के अनुसार काशी के विद्वान पंडितों द्वारा मंत्रोच्चारण करते हुए 7 हजार किलो मेवा, 10 हजार चंदन की लकडिय़ों तथा 3 हजार किलो घी से 9 कुंडीय अति विराट दिव्य यज्ञ में आहूतियां देनी शुरु की गयीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव