राजस्थान में 580 करोड़ का निवेश, 1699 को रोजगार
जयपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए संचालित राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत राज्य सरकार ने 6 से अधिक उद्यमों को विभिन्न प्रोत्साहन और रियायतों की मंजूरी दी है। इन उद्यमों में करीब 580 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश हुआ है, जबकि इनके माध्यम से 1699 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
सरकार का मानना है कि योजना के तहत दिए जा रहे प्रोत्साहन से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी और नए निवेशकों को राजस्थान में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना राज्य में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है। इसके तहत विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के साथ-साथ हरित निवेश, निर्यात संवर्धन तथा प्रशिक्षण एवं कौशल विकास से जुड़े उद्यमों को विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
योजना का उद्देश्य निवेशकों को आर्थिक संबल उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
योजना के तहत 25 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले पात्र उद्यमों को राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति के माध्यम से विभिन्न लाभ स्वीकृत किए जाते हैं। इसी क्रम में 19 अगस्त को अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य शिखर अग्रवाल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पात्रता के अनुसार विभिन्न उद्यमों को एसेट क्रिएशन इंसेंटिव, थ्रस्ट बूस्टर एवं ब्याज अनुदान, विद्युत शुल्क में छूट तथा ग्रीन इंसेंटिव सहित कई लाभ मंजूर किए गए।
सरकार के अनुसार, इन स्वीकृत प्रोत्साहनों का सीधा असर प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसरों पर दिखाई देगा। करीब 580 करोड़ रुपये के वास्तविक निवेश के साथ 1699 लोगों के लिए रोजगार सृजित होना योजना के क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है। इससे प्रदेश में नए उद्योगों की स्थापना के साथ मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र उद्यमों को अनुदान और अन्य लाभ स्वीकृत करने की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया गया है। डिजिटल माध्यम से आवेदन और स्वीकृति की प्रक्रिया निवेशकों के लिए सुविधा बढ़ाने के साथ विभाग की औद्योगिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग शिखर अग्रवाल ने बताया कि योजना के तहत जिला स्तर और राज्य स्तर पर नियमित रूप से डीएलएसी और एसएलएससी की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
विभाग का मुख्य लक्ष्य पात्र उद्यमों को बिना अनावश्यक देरी के निर्धारित लाभ स्वीकृत करना है, ताकि निवेशकों को समय पर सरकारी प्रोत्साहन मिल सके और प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति बनी रहे।
सरकार को उम्मीद है कि निवेश प्रोत्साहन योजना के माध्यम से मिलने वाले आर्थिक लाभ और रियायतें राजस्थान को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाएंगी। इससे निवेश बढ़ने के साथ रोजगार सृजन, औद्योगिक विस्तार और राज्य के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

