'बेटी हुई है, लक्ष्मी आई है' लिखी सजी-धजी कार में नवजात का ग्रैंड वेलकम, पूरे शहर में चर्चा
पाली, 25 जुलाई (हि.स.)। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश देने वाली एक अनोखी पहल पाली के बांगड़ हॉस्पिटल में दिखी। अस्पताल परिसर में गुब्बारों और रंग-बिरंगे फूलों से सजी एक कार लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। कार पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था-बेटी हुई है, लक्ष्मी आई है। जिसने भी इस कार को देखा, उसकी नजर कुछ पल के लिए जरूर ठहर गई।
दरअसल, न्यू शक्ति नगर निवासी ललित कुमार और उनकी पत्नी निकिता के घर पहली संतान के रूप में बेटी ने जन्म लिया। बांगड़ हॉस्पिटल में जन्मी नन्ही परी का स्वागत परिवार ने किसी त्योहार से कम नहीं किया। शादी फरवरी 2025 में हुई थी और पहली संतान के रूप में बेटी के आगमन से पूरे परिवार में उत्सव का माहौल बन गया।
सबसे भावुक बात यह रही कि ललित कुमार के पैर में कुछ समय पहले हुए हादसे के कारण फ्रैक्चर है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी बेटी के स्वागत को यादगार बनाने का फैसला किया और परिवार से अस्पताल तक सजी-धजी कार लाने की इच्छा जताई। परिवार ने उनकी इस इच्छा को पूरा करते हुए कार को गुब्बारों और पोस्टरों से सजाया तथा उसी कार में मां और नवजात बेटी को सम्मानपूर्वक घर लेकर पहुंचे।
घर पहुंचने पर नन्ही मेहमान का पारंपरिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया गया। बेटी के पगचिह्न घर में अंकित किए गए और पूरे परिवार ने खुशियां मनाईं। इसके बाद ललित और निकिता ने अपनी नवजात बेटी को गोद में लेकर केक काटा और इस खास पल को परिवार के साथ यादगार बना दिया।
ललित और निकिता ने कहा कि आज के दौर में बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है। वे अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा, बेहतर संस्कार और हर वह अवसर देंगे, जिससे वह जीवन में आगे बढ़ सके। उनका विश्वास है कि उनकी बेटी भविष्य में परिवार और समाज का नाम रोशन करेगी।
बांगड़ हॉस्पिटल में सजी यह कार और बेटी के जन्म का अनोखा जश्न दिनभर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। यह पहल न केवल बेटी के जन्म की खुशी का उत्सव थी, बल्कि समाज को बेटियों के सम्मान और समानता का सकारात्मक संदेश भी दे गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

