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तबादला नीति की मांग पर ग्रेड थर्ड शिक्षकों का प्रदर्शन

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तबादला नीति की मांग पर ग्रेड थर्ड शिक्षकों का प्रदर्शन


जयपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। तबादला नीति लागू करने,थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक हटाने और डेपुटेशन नीति में पारदर्शिता की मांग को लेकर बुधवार को प्रदेशभर से आए ग्रेड थर्ड शिक्षकों ने जयपुर के शहीद स्मारक पर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनावी वादे से मुकरने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने धरनास्थल के बाहर खड़ी पिकअप से साउंड सिस्टम के लिए उपयोग हो रहे जनरेटर को हटवा दिया। शाम 4 बजे तक की अनुमति समाप्त होने के बाद पुलिस ने धरना स्थल खाली करने की चेतावनी भी दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की तनातनी हुई। संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक सुनील महला को बातचीत के लिए ले जाने का प्रयास किया गया, जिसका महिला शिक्षकों ने विरोध किया और उनके चारों ओर सुरक्षा घेरा बना लिया। कुछ शिक्षकों ने राष्ट्रगान और 'रघुपति राघव राजा राम' भजन गाकर विरोध जताया।

शिक्षकों के बढ़ते विरोध के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने वार्ता के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाया। शिक्षक संघ के संरक्षक सूरजभान सिंह शिक्षकों की समस्याओं की 'पोटली' लेकर मंत्री से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि पहली प्राथमिकता तबादला नीति लागू कराने की है और इसी पर सहमति बनने के बाद आगे की बातचीत होगी।

संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक सुनील महला ने कहा कि भाजपा ने सरकार बनने के 100 दिन में थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादले करने का वादा किया था, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद कोई निर्णय नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अब शिक्षक केवल तबादलों की मांग ही नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने बताया कि पति-पत्नी की अलग-अलग जिलों में पोस्टिंग होने से पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है। कई शिक्षकों को अपने छोटे बच्चों को दादा-दादी के पास छोड़ना पड़ रहा है। उनका कहना था कि परिवार से लंबे समय तक दूर रहने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर शिक्षण कार्य पर भी पड़ रहा है। प्रदर्शन में कई शिक्षक अपने बच्चों के साथ भी शामिल हुए।

शिक्षकों ने मांग की कि स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध तबादला नीति लागू की जाए, डेपुटेशन नीति की विसंगतियां दूर की जाएं तथा लंबे समय से तबादलों पर लगी रोक तत्काल हटाई जाए। उनका कहना था कि वे केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि परिवार के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मांग रहे हैं। यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश