डूंगरपुर में चांदीपुरा वायरस की आशंका से बच्ची की मौत, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
डूंगरपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। जिले में दो वर्ष बाद एक बार फिर चांदीपुरा वायरस ने दस्तक दी है। सीमलवाड़ा ब्लॉक के रतनपुरा गांव में छह वर्षीय बच्ची की संदिग्ध संक्रमण से मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। बच्ची के सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित वायरोलॉजी प्रयोगशाला भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण की पुष्टि हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संदिग्ध मामला सामने आते ही गांव में चिकित्सा टीम तैनात कर दी गई है। टीम द्वारा घर-घर सर्वे, सैंपलिंग, दवा वितरण और लोगों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है। वहीं पशुपालन विभाग भी प्रभावित क्षेत्र में स्प्रे और जांच कार्य में जुट गया है।
एपिडिमियोलॉजिस्ट शमसुजोहा ने बताया कि आदिवासी बहुल डूंगरपुर और बांसवाड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार मवेशियों के साथ या उनके नजदीक रहते हैं। चांदीपुरा वायरस रेतीली मक्खी (सैंड फ्लाई) के काटने से फैलता है, जो आमतौर पर पशुओं के रहने वाले स्थानों के आसपास अधिक पाई जाती है। ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
जानकारी के अनुसार 13 जुलाई की शाम बच्ची ने घर का भोजन खाने से मना कर दिया था। इसके बाद उसकी मां पड़ोसी के घर से दही-चावल लेकर आई। भोजन करने के कुछ घंटों बाद रात करीब साढ़े दस बजे बच्ची की तबीयत बिगड़ गई। उसे तेज ठंड लगने लगी और उल्टियां शुरू हो गईं। परिजन पहले सीमलवाड़ा के एक निजी अस्पताल, फिर गुजरात के मेघरज, मोडासा और बाद में हिम्मतनगर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने चांदीपुरा वायरस की आशंका जताते हुए सैंपल लिए, लेकिन उपचार के दौरान 15 जुलाई को बच्ची की मौत हो गई।
उल्लेखनीय है कि जुलाई 2024 में डूंगरपुर जिले के रामसोर और बालदिया गांव तथा उदयपुर जिले के कल्याणपुर क्षेत्र में भी चांदीपुरा वायरस के संदिग्ध संक्रमण से बच्चों की मौत हुई थी। ऐसे में नया मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने विशेष निगरानी शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह संक्रमण मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। संक्रमण होने पर तेज बुखार, उल्टियां, दौरे, दिमाग की झिल्ली में सूजन और गंभीर स्थिति में कोमा जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
सीएमएचओ डॉ. अलंकार गुप्ता ने बताया कि गांव में चिकित्सा दल लगातार निगरानी कर रहा है तथा जरूरत के अनुसार सैंपल लेकर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. दिनेशचंद्र बामनिया ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में मवेशी बाड़ों और घरों के आसपास कीटनाशक स्प्रे कराया जा रहा है। पशुओं को आवश्यक टीके और उपचार भी दिए जा रहे हैं। सोमवार से विशेष पशु स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर पशुओं के नमूने भी लिए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से घरों और पशु बाड़ों की नियमित सफाई रखने, कीटनाशकों का उपयोग करने, बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाने तथा तेज बुखार या दौरे जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

