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राजस्थान में सूखे के हालात पर गहलोत ने सरकार को घेरा, कहा- तत्काल बने व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना

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राजस्थान में सूखे के हालात पर गहलोत ने सरकार को घेरा, कहा- तत्काल बने व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना


जयपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में बारिश की कमी और सूखे के बनते हालात को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है।

गहलोत ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि प्रदेश में पिछले करीब दस वर्षों में सबसे गंभीर अकाल जैसी स्थिति सामने आ रही है। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में पशुओं के चारे और पेयजल संकट को लेकर चिंता जताई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश के 16 जिलों के करीब 16,400 गांवों में पानी, चारे और रोजगार से जुड़ी जरूरतों को लेकर प्रशासन स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

गहलोत ने अपनी पोस्ट में बताया कि जोधपुर जिले के करीब 2 हजार गांवों में सूखे जैसे हालात हैं। वहीं बाड़मेर के 2,460, बालोतरा के 1,216 और जैसलमेर के 961 गांव प्रभावित बताए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी स्थिति चिंताजनक है और पशुपालकों के सामने चारे का संकट लगातार बढ़ रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जोधपुर, बाड़मेर और बालोतरा में चारे की कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने चारे का भाव करीब 1,200 रुपये प्रति मन तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए कहा कि इतनी महंगी कीमत पर चारा खरीदना पशुपालकों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में सबसे ज्यादा संकट पशुधन पर पड़ने की आशंका है।

गहलोत ने सरकार से प्रदेशभर में चारे और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए रोजगार और मजदूरी की व्यवस्था पहले से शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि सूखे से प्रभावित परिवारों को समय पर राहत नहीं मिली तो आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

उन्होंने बाड़मेर में मुख्यमंत्री की ओर से दो दिन पहले की गई घोषणाओं का भी जिक्र किया। गहलोत के अनुसार 48 घंटे बाद भी प्रशासन को सरकार से लिखित स्वीकृति का इंतजार बताया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में देरी से काम नहीं चलेगा और सरकार को तत्काल प्रदेशभर के लिए व्यापक आकस्मिक कार्ययोजना बनाकर आवश्यक स्वीकृतियां जारी करनी चाहिए।

गहलोत ने इससे पहले भी जोधपुर में बारिश की कमी को गंभीर चुनौती बताते हुए सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में पेयजल, चारे और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था की आकस्मिक योजना बनाने की मांग की थी।

इस बीच राज्य सरकार की ओर से सूखे की स्थिति से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के स्तर पर कार्ययोजना तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार पेयजल संकट से निपटने के लिए 650 वाहन और 3,200 श्रमिक लगाए गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित