गणपति बप्पा की विदाई पर छलके आंसू, नम आंखों से दी श्रद्धासुमन
उदयपुर, 25 सितम्बर (हि.स.)। दस दिनों तक भक्ति, उत्साह और अटूट आस्था के साथ पूजे गए विघ्नहर्ता श्री गणेश का उत्सव अनंत चतुर्दशी के अवसर पर धार्मिक व भावुक माहौल में संपन्न हो गया। झीलों की नगरी उदयपुर में सुबह से ही ढोल-नगाड़ों और 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के गगनभेदी जयकारों के साथ विसर्जन शोभायात्राएं निकाली गईं।
उत्सव के समापन पर जहां एक ओर ढोल-नगाड़ों की थाप पर उल्लास का माहौल था, वहीं दूसरी ओर अपने आराध्य से बिछड़ने का दर्द भी श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोला। विसर्जन के दौरान कई श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई भक्तों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
शहर के प्रमुख जलाशयों—दूधतलाई कुंड, गोवर्धन सागर, ऐतिहासिक गणगौर घाट और स्वरूपसागर स्थित काला किवाड़ पर बप्पा के विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से शुरू हुआ विसर्जन का यह क्रम देर शाम तक अनवरत जारी रहा।
उत्सव के दस दिनों में बप्पा के साथ बने गहरे आध्यात्मिक और भावनात्मक जुड़ाव के कारण विदाई की बेला हर किसी के लिए भावुक कर देने वाली रही। विसर्जन स्थल पर एक युवती अपने आराध्य को दूर जाता देख अपने आंसुओं को रोक नहीं पाई। वह बप्पा को अपने से दूर नहीं करना चाहती थी और रोते हुए विदाई देती नजर आई। सिर्फ वही नहीं, बल्कि वहां मौजूद कई अन्य श्रद्धालुओं की आंखें भी विदाई के इस क्षण में नम हो गईं।
झीलों के संवर्धन और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा जलाशयों के किनारे बनाए गए विशेष कुंडों में ही प्रतीकात्मक रूप से विसर्जन कराया गया। वहीं, अनेक जागरूक नागरिकों ने घरों में ही ईको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का विसर्जन कर पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया।
विसर्जन शोभायात्राओं के सुचारू संचालन के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से शहर के प्रमुख मार्गों—तीज का चौक, घंटाघर, जगदीश चौक, दिल्ली गेट और दूधतलाई रोड पर यातायात डायवर्ट किया गया, जिससे आमजन को परेशानी न हो। बिछड़ने के इसी दर्द और अगले वर्ष फिर से बप्पा के आगमन की आस के साथ उदयपुरवासियों ने अपने विघ्नहर्ता को विदाई दी।
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

