गंगा दशहरा पर होगा दुर्लभ शुभ योगों का महासंयोग:जयपुर शहर के मंदिरों में सजेंगी झांकियां
जयपुर, 23 मई (हि.स.)। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी पर 25 मई को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा इस बार दुर्लभ एवं अत्यंत शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, महाआरती, झांकियों और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस अवसर पर गंगा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप और शिव-गंगा पूजा का विशेष महत्व रहेगा। वहीं राधा माधव जी मंदिर में 20 ब्राह्मण बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार वैदिक रीति-विधान से संपन्न कराया जाएगा।
पंडित बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष गंगा दशहरा पर हस्त नक्षत्र, रवि योग, व्यातिपात योग, आनंद योग तथा गुरु-चंद्रमा की युति से बनने वाला गजकेसरी योग सहित पांच विशेष शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है। ऐसे दुर्लभ योगों में किए गए स्नान, दान और धार्मिक अनुष्ठानों का पुण्यफल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। ब्रह्मपुराण में गंगा दशहरा को दस प्रकार के पापों के नाश का पर्व बताया गया है।
उन्होंने कहा कि इस दिन गंगा स्नान और दान करने से तीन कायिक, चार वाचिक और तीन मानसिक दोषों का शमन होता है। इस बार गंगा दशहरा सोमवार को पड़ रहा है, जो भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। मान्यता है कि मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, ऐसे में शिव और गंगा पूजा का विशेष संयोग बन रहा है। श्रद्धालु इस दिन भगवान शिव एवं मां गंगा की आराधना कर रोग, भय और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना करेंगे।
पंडित राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि गंगा दशमी स्वयं सिद्ध अबूझ मुहूर्त मानी जाती है, जिसमें बिना पंचांग देखे मांगलिक और शुभ कार्य संपन्न किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दीपदान और पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। गंगा दशमी पर मिट्टी के 10 दीपक जलाने तथा पानी से भरा घड़ा, खरबूजा, आम, गुड़, तिल, सत्तू और हाथ का पंखा दान करना विशेष फलदायी माना गया है।
वैदिक पंचांग के अनुसार दशमी तिथि का प्रारंभ 25 मई को प्रातः लगभग 4:30 बजे से होगा और समापन 26 मई को प्रातः लगभग 5:10 बजे तक रहेगा। गंगा स्नान एवं पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 5:34 बजे से 7:16 बजे तक रहेगा, जबकि पूजा-अर्चना का शुभ समय सुबह 8:58 बजे से 10:39 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से 1:02 बजे तक रहेगा। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि, आयुष्मान, शुभ और शोभन योग सुबह 11:32 बजे तक प्रभावी रहेंगे, जबकि सौभाग्य और अमृत योग दोपहर बाद से प्रारंभ होंगे।
इधर गंगा दशमी के पावन अवसर पर राधा माधव जी मंदिर में 20 ब्राह्मण बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार आयोजित किया जाएगा। आयोजन श्री गोविन्द देव जी मंदिर के महंत अंजन कुमार गोस्वामी एवं संत-महंतों के सान्निध्य में अभिजीत मुहूर्त में संपन्न होगा। कार्यक्रम की तैयारियों के तहत गोविंद धाम में सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने पोस्टर का पूजन किया, वहीं चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में भगवान गणेश को आयोजन का निमंत्रण अर्पित किया गया।
वेदाचार्य डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में ग्रह शांति पूजन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बटुकों को यज्ञोपवीत धारण करवाया जाएगा। गणेश निमंत्रण कार्यक्रम में सुदर्शनाचार्य महाराज, रामरज दास त्यागी, धर्म प्रचारक विजय शंकर पांडे सहित अनेक संत-महंत उपस्थित रहे। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।
इसी क्रम में राजभवन में शनिवार को राज्यपाल ने आगामी सामूहिक यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार महोत्सव के पोस्टर का विमोचन किया। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों से जुड़े संत-महंत और आयोजन समिति के पदाधिकारी मौजूद रहे। आयोजन समिति के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल को बताया कि 25 मई को आयोजित होने वाले इस समारोह में बड़ी संख्या में बालकों का वैदिक रीति-रिवाजों एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाएगा। समारोह में धार्मिक अनुष्ठान, वैदिक मंत्रोच्चार एवं आशीर्वचन कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
राज्यपाल ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भारतीय परंपराओं और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पोस्टर विमोचन के दौरान संत-महात्माओं एवं आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समाज के लोगों से सहयोग एवं सहभागिता की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

