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शहर में बनाए जाएंगे पांच नए फायर स्टेशन, जगह खोजने में जुटा दमकल विभाग

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शहर में बनाए जाएंगे पांच नए फायर स्टेशन, जगह खोजने में जुटा दमकल विभाग


जयपुर, 14 मई (हि.स.)। गर्मी की शुरूआत के साथ ही शहर में आगजनी की घटनाओं में इजाफा होने लगा है। शहर के विस्तार और बढ़ती जनसंख्या के बीच अब मौजूद संसाधन कम पडऩे लगे है। इसी को ध्यान में रखकर दमकल विभाग ने शहर में 5 नए फायर स्टेशन खोलने की योजना बनाई है। फायर स्टेशन के लिए शहर में जमीन की तलाश की जा रही है। नए फायर स्टेशन के साथ जयपुर को 20 नई दमकल भी मिलने की उम्मीद है।

चीफ फायर ऑफिसर गाैत्तम लाल ने बताया कि शहर में बढ़ती आबादी और आगजनी की घटनाओं काे ध्यान में रखकर पांच नए फायर स्टेशन बनाए जाने प्रस्तावित है। इनके लिए जमीन की खाेज की जा रही है।

जयपुर में वर्तमान में 12 फायर स्टेशन मौजूद है। शहर के प्रमुख केंद्रों में 22 गोदाम, मानसरोवर, विश्वकर्मा, बनीपार्क, घाटगेट, मालवीय नगर, बिंदायका शामिल है। फायर स्टेशनों पर जरुरत के हिसाब से अलग-अलग दमकल मौजूद है। कुछ केंद्रों पर बड़ी आग बुझाने के लिए 6 से अधिक गाडिय़ां उपलब्ध हैं। दमकल विभाग जयसिंहपुरा, निवारू रोड, अखेपुरा, इंदिरा गांधी नगर और वैशाली नगर मेंं नए फायर स्टेशन बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए निगम, जेडीए और हाउसिंग बोर्ड से जमीन मांगी जा रही है। 50 हजार की जनसंख्या पर एक दमकल की जरुरत मानी जा रही है। वर्तमान में जयपुर की आबादी 50 से 60 लाख के बीच है। वर्तमान में अग्निशमन विभाग के पास 63 दमकल मौजूद है। दमकलों की खरीद के बाद 20 नई दमकलें बेंडे में शामिल हो जाएगी।

राज्य सरकार ने साल 2025 की बजट घोषणा में दमकल सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत प्रदेशभर में 250 नए अग्निशमन वाहन खरीदे जाएंगे। वहीं पुराने उपकरणों का आधुनिकीकरण और दमकल कर्मियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को भी मजबूत किया जाएगा। ताकि न केवल दीपावली जैसे त्योहारी सीजन में बल्कि, भविष्य में भी शहरी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा तंत्र को सशक्त बनाया जा सके। राजस्थान में लगातार हो रहे आगजनी के हादसों के बाद शासन और प्रशासन एक्टिव मोड में आ गया है। हाल ही में स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आगजन की घटनाओं को ध्यान में रखकर सर्वे करवाया गया है। सर्वे के दौरान दमकल वाहनों की तकनीकी स्थिति, मशीनों की कार्य क्षमता, उपलब्ध मैनपावर, आपदा के दौरान प्रतिक्रिया समय, पानी की आपूर्ति व्यवस्था के साथ ही सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता की बारीकी से जांच की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश