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अधिक मास संकीर्तन का अंतिम पड़ाव

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अधिक मास संकीर्तन का अंतिम पड़ाव


जोधपुर, 12 जून (हि.स.)। परमहंस परिव्राजकाचार्य स्वामी ईश्वरानन्द गिरि महाराज द्वारा स्थापित जोधपुर संवित साधनायन सोसायटी के तत्वावधान में सूर्यनगरी के विभिन्न क्षेत्रों, आवासीय कॉलोनियों में पिछले एक माह से चल रहे श्रीपुरुषोत्तम अधिक मास संकीर्तन का अंतिम पड़ाव 13 जून को चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में संकीर्तन के साथ होगा।

28 दिनों तक संकीर्तन के बाद 14 जून को संवित भोगीशैल परिक्रमा एवं 15 जून को संवित धाम आश्रम में नव कुण्डीय श्रीपुरुषोत्तम सहस्रनाम विष्णु हवन के साथ ही एक माह का दिव्य अनुष्ठान संपन्न होगा। सन्त सरोवर सोमाश्रम अरबुदाचल के अधिष्ठाता स्वामी संवित सच्चिदानंद गिरि महाराज की उपस्थिति में 15 जून को दोपहर 3.30 बजे हवन प्रारंभ होगा, छह बजे पूर्णाहुति के बाद धर्म सभा होगी जिसमें स्वामी सच्चिदानंद गिरि महाराज का प्रवचन भी होगा।

जोधपुर संवित् साधनायन सोसायटी की अध्यक्षा रानी उषा देवी और सचिव भरत जोशी ने बताया कि दईजर लाछा बासनी में स्थापित संवित् धाम आश्रम में 15 जून को दोपहर 3.30 बजे से नौ कुण्डीय श्रीविष्णु सहस्रनाम पुरुषोत्तम हवन का आयोजन किया जायेगा जिसमें घृत, शाकल्य, कमलगट्टा के साथ साथ कमल पुष्प और मालपुओं से वैदिक मन्त्रो के साथ आहुतियां दी जाएगी।

श्रीविष्णु सहस्रनाम पुरुषोत्तम हवन में वैदिक मन्त्रों का सामूहिक पाठ वरिष्ठ संवित् साधक महेश हर्ष, महेश जोशी, तरुण व्यास, जयशंकर पुरोहित, नटवर व्यास, शैलेश व्यास, शेखर थानवी के साथ अन्य साधक मिलकर करेंगे।

जोधपुर संवित् साधनायन सोसायटी के उपाध्यक्ष डॉ. सीएस कल्ला और श्यामकिशन बोहरा ने बताया कि 15 जून को श्रीविष्णु सहस्रनाम पुरुषोत्तम हवन का शुभारभ गणपति पूजन, षोडश मातृका पूजन, सप्त घृत मातृ पूजन, नवग्रह पूजन, रूद्र कलश पूजन, प्रधान पीठ श्रीविष्णु पूजन, श्रीगुरु पूजन, ब्रह्मा पूजन, हवन कुण्ड पूजन, श्रुवा शूचि पूजन के बाद आघार आहुति और सभी पीठों की पूजा की जाएगी। हवन के लिए रामराज पुरोहित, अनुज अवस्थी, अनिल राघवानी, महेश बोहरा, दिनेश जोशी, सुरेश हर्ष, संतोष लोहरा, एस पी छंगाणी, कुलदीप राजपुरोहित, बालूराम, नेमाराम गहलोत सहित अनेक साधक विशेष सहयोग कर रहे हैं।

हवन का प्रारम्भ गणपति, गुरु, नवग्रह, दिक्पाल पूजन के बाद श्रीपुरुष सूक्त, श्रीसूक्त और नील सूक्त मंत्रों के साथ मूल मंत्र के 108 नामावलि से आहुतियां दी जायेगी। उसके बाद प्रत्येक हवन कुण्ड में 33-33 मालपुओं के बाद श्रीविष्णु सहस्रनाम से 1008 आहुतियां दी जायेगी।

28 नाम से प्रायश्चित हवन, नवाहुति हवन, बलि एक तन्त्रेण हवन, क्षेत्रपाल बलि, उत्तर पूजन से साथ ही पूर्णाहति और वसोधारा के साथ भस्म धारण, परिक्रमा और गुरु पूजन के साथ ही श्रीविष्णु सहस्रनाम हवन सम्पूर्ण होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश