छह दिन का रहेगा दीपोत्सव: धनतेरस से होगी शुरुआत
जयपुर, 05 नवंबर (हि.स.)। इस बार दीपोत्सव पांच नहीं, बल्कि छह दिनों का रहेगा। 6 नवंबर को धनतेरस से शुरू होने वाला दीपोत्सव 11 नवंबर को भैया दूज के साथ संपन्न होगा। इस दौरान धनतेरस, धन्वंतरि जयंती, रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी, हनुमान जन्मोत्सव, दीपावली, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट सहित कई पर्व मनाए जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य बनवारी लाल शर्मा के अनुसार इस बार दीपोत्सव के दौरान कई शुभ योग और मुहूर्त बन रहे हैं।
धनतेरस के साथ दीपोत्सव की शुरुआत होगी। इस दिन सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की परंपरा है। खरीदारी के लिए सुबह सूर्योदय से 10:49 बजे तक चर एवं अमृत चौघड़िया, दोपहर 12:10 से 1:32 बजे तक शुभ चौघड़िया और शाम 4:15 बजे से रात तक चर चौघड़िया रहेगा। शाम को प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार पर चौमुखा दीपक जलाकर यम दीपदान किया जाएगा।
शनिवार को धन्वंतरि जयंती, रूप चतुर्दशी, नरक चतुर्दशी और हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र और प्रीति योग का संयोग रहेगा। भगवान धन्वंतरि की पूजा कर आरोग्य और दीर्घायु की कामना की जाएगी। रूप चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान, उबटन और श्रृंगार की परंपरा निभाई जाएगी। नरक चतुर्दशी पर दीपदान होगा। वहीं हनुमान जन्मोत्सव पर मंदिरों में सुंदरकांड, हनुमान चालीसा के पाठ और विशेष श्रृंगार के आयोजन होंगे।
रविवार को प्रदोष काल में मुख्य दीपावली पर्व मनाया जाएगा। घरों और प्रतिष्ठानों में मां महालक्ष्मी और भगवान गणेश का पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. मिश्रा के अनुसार, लक्ष्मी पूजन के लिए पहला विशेष मुहूर्त शाम 6:16 से 6:28 बजे तक और दूसरा शाम 6:52 से 7:05 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:30 से रात 8:14 बजे तक तथा वृषभ लग्न शाम 6:30 से रात 8:01 बजे तक रहेगा। व्यापारियों के लिए सिंह लग्न में बही-खाता पूजन का समय रात 12:34 से 2:50 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शाम 5:36 से रात 10:32 बजे तक शुभ, अमृत और चर चौघड़िया में भी पूजन किया जा सकेगा।
मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में गोबर से भगवान गिरिराज गोवर्धन का स्वरूप बनाकर पूजा करेंगे। मंदिरों में भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया जाएगा। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। यह पर्व प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और गौसेवा का संदेश देता है। इस दिन गौक्रीड़ा और बलिराज पर्व मनाने की भी परंपरा है।
बुधवार को भैया दूज के साथ छह दिवसीय दीपोत्सव का समापन होगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और राजयोग का संयोग रहेगा। बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करेंगी। भाई भी बहनों को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प दोहराएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना के स्नेह से जुड़ा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

