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नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ का खूनी हमला, घास काटने गई महिला मजदूर की मौत

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नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बाघ का खूनी हमला, घास काटने गई महिला मजदूर की मौत


जयपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब बाघ शिवाजी ने घास काटने के लिए बाड़े में गई महिला मजदूर पर हमला कर दिया। बाघ के हमले में 42 वर्षीय सुगना देवी की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण पार्क पहुंच गए।

जानकारी के अनुसार जमवारामगढ़ क्षेत्र के नांगल सुसावतान गांव निवासी सुगना देवी अन्य महिला मजदूरों के साथ घास काटने के लिए पार्क पहुंची थीं। मृतका की बड़ी बहन कमला देवी के अनुसार कुल सात महिलाएं बाघ शिवाजी के बाड़े में घास काटने गई थीं। उनका दावा है कि उस समय बाघ अंदर बने पिंजरे में बंद था।

महिलाओं के मुताबिक बाड़े में प्रवेश करने के कुछ ही देर बाद पिंजरे का गेट खुल गया और बाघ बाहर निकल आया। अचानक बाघ को सामने देखकर महिलाओं में भगदड़ मच गई। पांच महिलाएं बाड़े से बाहर की ओर भागीं, जबकि एक महिला पेड़ पर चढ़ गई।

बताया गया कि सुगना देवी ने भी बाघ से बचने के लिए बाड़े के जाल पर चढ़ने का प्रयास किया।

इसी दौरान बाघ ने उस पर हमला कर दिया और उसे नीचे खींच लिया। बाघ के हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई। घटनास्थल पर घास काटने वाली दरांती भी पड़ी मिली।

महिलाओं का कहना है कि बाघ करीब चार-पांच मिनट तक बाड़े में खुला घूमता रहा और उनके पीछे दौड़ा। घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने बाघ को दोबारा पिंजरे में बंद किया। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के करीब तीन घंटे बाद तक सुगना देवी का शव बाड़े के अंदर ही पड़ा रहा।

दोपहर करीब 12 बजे तक शव को बाहर नहीं निकाला जा सका था। इस दौरान पार्क के बाहर ग्रामीणों और परिजनों की भीड़ जुटने लगी।

घटना की सूचना मिलते ही आमेर विधायक प्रशांत शर्मा भी नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क पहुंचे और मौके पर मौजूद लोगों से समझाइश का प्रयास किया। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए आमेर और आसपास के थानों से पुलिस बल भी मौके पर बुलाया गया। महिला की मौत की खबर फैलते ही जमवारामगढ़ क्षेत्र से बड़ी संख्या में ग्रामीण पार्क पहुंच गए। सायवाड़ के पूर्व सरपंच राजेंद्र बुनकर सहित ग्रामीणों ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

ग्रामीणों ने मृतका के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई। ग्रामीणों के अनुसार सुगना देवी परिवार की मुख्य कमाने वाली थीं। उनके पति दिव्यांग हैं और दो बच्चे हैं। ऐसे में महिला की मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

घटना के बाद साथ गई महिलाओं ने पार्क कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जब वे बाड़े में घुसी थीं, तब बाघ पिंजरे में बंद था, लेकिन कुछ ही देर बाद वह बाहर आ गया। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि यदि पिंजरे का द्वार नहीं खोला जाता तो यह हादसा नहीं होता।

हालांकि, बाघ के पिंजरे से बाहर आने की परिस्थितियों और हादसे में लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क की खासियत यह है कि यहां बचाव केंद्र, सफारी और चिड़ियाघर तीनों एक ही परिसर में संचालित होते हैं। पार्क में कुल 15 बाघ बताए गए हैं। युवा बाघों को करीब एक किलोमीटर के सुरक्षित क्षेत्र में रखा जाता है। यहां दो सफेद बाघ भी मौजूद हैं।

बुधवार की घटना ने पार्क में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों का गुस्सा, मुआवजे की मांग और महिला मजदूरों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित