दुर्गा पूजा के रंग में रंगेगा जयपुर: 70 से अधिक पंडालों में सजेगी मां दुर्गा की झांकी
जयपुर, 16 सितंबर (हि.स.)। गुलाबी नगरी में शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस बार नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे है । जयपुर शहर में 70 से अधिक छोटे-बड़े पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। वहीं इस धार्मिक आयोजन के साथ यह उत्सव जयपुर की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुर्गा पूजा की पौराणिक मान्यता मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और धर्म की अधर्म पर विजय से जुड़ी है। जयपुर में बंगाली संस्कृति से इसके ऐतिहासिक संबंध आमेर के राजा मानसिंह प्रथम द्वारा बंगाल के जैसोर से शिला माता की प्रतिमा लाकर आमेर में स्थापित किए जाने से भी जुड़े हैं।
1956 में बनी दुर्गा बाड़ी एसोसिएशन
शहर में बनीपार्क स्थित दुर्गा बाड़ी एसोसिएशन की स्थापना 1956 में हुई थी। यह शहर की सबसे पुरानी पंजीकृत दुर्गा पूजा संस्थाओं में शामिल है। सी-स्कीम की प्रोबासी बंगाली कल्चरल सोसायटी भी प्रमुख आयोजन केंद्र है। मालवीय नगर का पूजा हब और महिलाओं द्वारा संचालित द आनंदोप्रभा सोसायटी विशेष आकर्षण रहेंगे। इसके अलावा श्री काली पूजा समिति, अग्रेनी एसडीएम पार्क पूजा समिति (तिलक नगर), प्रताप नगर और जगतपुरा की विभिन्न सोसायटियां भी आयोजन करेंगी।
जनसहयोग से तैयार होते हैं पंडाल
दुर्गा पूजा की व्यवस्थाओं में स्थानीय युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रहती है। पंडाल निर्माण, व्यवस्था और प्रसाद वितरण में लोग श्रमदान करते हैं। आयोजन का खर्च समाज के विभिन्न वर्गों से मिलने वाले स्वैच्छिक सहयोग से संचालित किया जाता है। बंगाली परंपरा में महाअष्टमी पर कुमारी पूजा भी होगी, जिसमें कन्या को देवी स्वरूप मानकर पूजा की जाती है।
मूर्तिकारों से लेकर छोटे दुकानदारों तक को रोजगार
दुर्गा पूजा का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देता है। नवरात्रि से कई माह पहले पश्चिम बंगाल से मूर्तिकार जयपुर पहुंचकर पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं तैयार करते हैं। जौहरी बाजार, बापू बाजार सहित अन्य प्रमुख बाजारों में कपड़े, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने का दावा किया गया है। पंडालों के आसपास बंगाली व्यंजन, खिलौने और हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए जाते हैं। वहीं आनंदमेला के माध्यम से गृहणियों को भी अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिलता है।
सप्तमी से नवमी तक मिलेगा महाभोग
महा सप्तमी से महा नवमी तक दोपहर में सभी प्रमुख पंडालों में आमजन को निःशुल्क महाभोग प्रसाद वितरित किया जाएगा। शाम 6 बजे से रात 11 बजे तक पंडालों में विशेष सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ बंगाली कला, संगीत और संस्कृति की भी झलक देखने को मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

