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कला, इतिहास और आधुनिकता के संगम से दिवेर विजय महोत्सव में जीवंत हुआ मेवाड़ का शौर्य

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कला, इतिहास और आधुनिकता के संगम से दिवेर विजय महोत्सव में जीवंत हुआ मेवाड़ का शौर्य


कला, इतिहास और आधुनिकता के संगम से दिवेर विजय महोत्सव में जीवंत हुआ मेवाड़ का शौर्य


उदयपुर, 21 सितम्बर (हि.स.)। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अंतर्गत संचालित प्रताप गौरव केंद्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' में 16 सितंबर से चल रहे दस दिवसीय दिवेर विजय महोत्सव 2026 के अंतर्गत सोमवार का दिन कला, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक अभिव्यक्ति के अनूठे संगम का साक्षी बना। 'उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला' (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) एवं 'प्रताप गौरव केंद्र' के संयुक्त तत्वावधान तथा 'संस्कार भारती' उदयपुर महानगर इकाई के सहयोग से राष्ट्रीय चित्रकला कार्यशाला विशेष सत्र का आयोजन हुआ।

कलाकारों का सृजन ही आने वाली पीढ़ियों की प्रेरणा: कुलगुरु कैलाश डागा

मेवाड़ का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक परिदृश्य विषयक इस कार्यशाला का उद्देश्य मेवाड़ की अमर वीरगाथाओं को कैनवास पर जीवंत रूप प्रदान करना है। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलगुरु कैलाश डागा ने देशभर से आए ख्यातनाम राष्ट्रीय चित्रकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि मेवाड़ की पावन धरा का कण-कण त्याग और शौर्य की कथाओं से गुंजायमान है। हमारे मानस में रची-बसी इन ऐतिहासिक गाथाओं को दृश्य रूप में साकार करने का पुण्य कार्य कलाकार ही करते हैं, जो भावी पीढ़ियों के लिए निरंतर राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा बनते हैं।

कार्यशाला संयोजक प्रो. रामसिंह भाटी ने बताया कि इस विशेष आयोजन में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान सहित विभिन्न प्रांतों के शीर्ष चित्रकार भाग ले रहे हैं। इनमें डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा उत्तर प्रदेश, मनोजकुमार सकळे महाराष्ट्र, कुदालैय्या हिरेमढ महाराष्ट्र, घनश्याम कश्यप हिमाचल प्रदेश, डॉ. मनोज बालियान दिल्ली, डॉ. सुनील कुमार सिंह कुशवाहा उत्तर प्रदेश, डॉ. दुर्जन सिंह राणा उत्तर प्रदेश, दीपांकर रे पश्चिम बंगाल, अभिषेक सुरेश आचार्य महाराष्ट्र, विवेक दहिवले महाराष्ट्र, ऋषि राज तोमर चंडीगढ़, ओंकार अशोक पवार महाराष्ट्र, अद्वैत किशोर नादवडेकर महाराष्ट्र, अंकुश कुमार जम्मू एवं कश्मीर, विजय चंद्रकांत जाधव महाराष्ट्र, डॉ. मुकेश सालवी गुजरात, डॉ. पुष्कर लोहार राजस्थान, नवल सिंह राजस्थान, डॉ. सुरेंद्र सिंह चुण्डावत राजस्थान, मांगीलाल महावर शामिल हैं। उद्घाटन समारोह में सभी आमंत्रित कलाकारों को उपरणा ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। विशेष सत्र के दौरान जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध चित्रकार अंकुश कुमार ने उपस्थित कलाप्रेमियों और विद्यार्थियों के समक्ष लाइव आर्ट डिमॉन्स्ट्रेशन के तहत महाराणा प्रताप का अति-मनमोहक और जीवंत चित्र बनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कैमरे के लेंस में उकेरी गई विरासत और आधुनिकता की अभिव्यक्ति

महोत्सव की श्रृंखला में पहली बार आयोजित दो-दिवसीय 'फोटो एवं रील मेकिंग वॉक' युवाओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। प्रतिभागियों ने प्रातः व सायं के सत्रों में प्रताप गौरव केंद्र के नयनाभिराम परिसर और ऐतिहासिक परिवेश को अपने कैमरों व स्मार्टफोन में कैद किया। युवाओं की रचनात्मक दृष्टि के जरिए महाराणा प्रताप का अदम्य स्वाभिमान और पराक्रम आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सजग रूप में अभिव्यक्त हुआ।

युवाओं के लिए हॉवरबोर्ड राइड का रोमांचक उपहार

नवाचारों के लिए प्रसिद्ध प्रताप गौरव केंद्र ने युवाओं के लिए एक और आधुनिक सौगात 'इलेक्ट्रिक हॉवरबोर्ड' (Electric Hoverboard) सेवा के रूप में प्रारंभ की है। 21 सितंबर से शुरू हुई इस रोमांचक राइड का नियमित शुल्क 250 रुपये प्रति 15 मिनट निर्धारित किया गया है, किंतु 'दिवेर विजय महोत्सव' के विशेष अवसर पर 26 सितंबर तक युवा मात्र 100 रुपये के रियायती शुल्क में इसका आनंद ले सकते हैं।

'दिवेर का रणघोष' नुक्कड़ नाटक ने जगाया राष्ट्रीय स्वाभिमान

महोत्सव के प्रचार-प्रसार और जन-जन में राष्ट्रभक्ति का अलख जगाने के उद्देश्य से सोमवार को हिरण मगरी सेक्टर-4 चौराहे पर प्रेरणादायी नुक्कड़ नाटक 'दिवेर का रणघोष' का सफल मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय और ओजस्वी संवादों ने उपस्थित आमजन में दिवेर के ऐतिहासिक युद्ध की स्मृतियों और महाराणा प्रताप के शौर्य को पुनर्जीवित कर दिया। मंगलवार शाम को पानेरियों की मादड़ी स्थित वानरेश्वर महादेव मंदिर में इसका मंचन होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता