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डिस्टर्ब एरियाज बिल 2026 भाजपा का राजनीतिक एजेंडा, संविधान के विरुद्ध है विधेयक: डोटासरा

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डिस्टर्ब एरियाज बिल 2026 भाजपा का राजनीतिक एजेंडा, संविधान के विरुद्ध है विधेयक: डोटासरा


जयपुर, 21 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा कैबिनेट बैठक में डिस्टर्ब एरियाज बिल–2026 के प्रारूप को मंजूरी देने पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान सम्मत न होकर भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास है और इसका उद्देश्य प्रदेश में शांति बनाए रखना नहीं, बल्कि राजस्थान जैसे शांत राज्य को जानबूझकर अशांत करना है।

पीसीसी वार रूम में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डोटासरा ने कहा कि यह बिल “गुजरात मॉडल” के नाम पर केंद्र से आई हुई पर्ची के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधेयक की भाषा ही संवैधानिक नहीं है और यह जनता का ध्यान सरकार की नाकामियों व मूलभूत मुद्दों से भटकाने के लिए लाया गया है। डोटासरा ने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 300-ए, जिसमें प्रत्येक नागरिक को अपनी संपत्ति पर अधिकार प्राप्त है, तथा अनुच्छेद 14, जिसमें समानता का अधिकार सुनिश्चित किया गया है, दोनों का उल्लंघन करता है। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विरुद्ध बताया।

उन्होंने कहा कि शांति बहाली के लिए पहले से ही आईपीसी (अब बीएनएस) और सीआरपीसी (अब बीएनएसएस) में पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, इसके बावजूद इस तरह का कानून लाना अनावश्यक और खतरनाक है।

पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि विधेयक में “जनसंख्या असंतुलन” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है, जो किसी भी कानून में परिभाषित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि डिस्टर्ब एरिया घोषित करने का आधार क्या होगा, इसका विधेयक में कहीं स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इससे स्पष्ट है कि कानून का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ उठाना और सांप्रदायिक भय का माहौल बनाना है।

डोटासरा ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक लागू हुआ तो प्रदेश में निवेश प्रभावित होगा, विकास की गति थमेगी, व्यापार घटेगा और जमीनों के दाम गिरेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जनप्रतिनिधियों से ऊपर अधिकारियों को अधिकार देना चाहती है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। इससे आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचेगा।

डोटासरा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी आगामी विधानसभा सत्र में इस विधेयक का पुरजोर विरोध करेगी।

कांग्रेस ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए इसे प्रदेश की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित