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होमगार्ड विभाग की चार दीवारी मामले में नोटिस के बाद नगर परिषद व जवान हुए आमने-सामने

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होमगार्ड विभाग की चार दीवारी मामले में नोटिस के बाद नगर परिषद व जवान हुए आमने-सामने


चित्तौड़गढ़, 05 अप्रैल (हि.स.)। शहर में गृह रक्षा प्रशिक्षण केंद्र की जमीन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में प्रशिक्षण केंद्र परिसर में बन रही चार दीवारी को लेकर नगर परिषद और होमगार्ड विभाग आमने-सामने आ गए हैं। इस दौरान करीब तीन थानों का पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है। नगर परिषद ने सरकारी मद से निर्मित भवन को अवैध बता कर नोटिस जारी कर दिया और जेसीबी और पुलिस बल लेकर ध्वस्त करने पहुंच गए, जहां होमगार्ड के जवान विरोध में उतर गए हैं। देर शाम को जिला कलक्टर ने दोनों विभाग के अधिकारियों को बुलाया है लेकिन स्पष्ट नहीं हुआ कि क्या निर्णय हुआ है।

नगर परिषद ने अतिक्रमण बताते हुए चार दीवारी हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया था। रविवार को नगर परिषद आयुक्त अतिक्रमण हटाने के लिए अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। यहां होमगार्ड कमांडेंट रविसिंह ने कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार विपिन चौधरी, सदर थाना अधिकारी प्रेमसिंह व शहर कोतवाल तुलसीराम प्रजापत पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे। मौके पर होमगार्ड कमांडेंट की ओर से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद मामले को लेकर जिला कलेक्टर डॉ. मंजू चौधरी से चर्चा जारी है।

80 लाख बजट स्वीकृत, 90% काम पूरा

इधर, मीडिया से बातचीत में होमगार्ड कमांडेंट रविसिंह ने बताया कि यह भूमि वर्ष 2013 में विधिवत रूप से गृह रक्षा प्रशिक्षण केंद्र को आवंटित की गई थी। उस समय भू-अभिलेख प्रक्रिया के तहत सीमांकन कर पत्थर गाड़े गए थे। बाद में 2021 में डीजीपीएस सर्वे के जरिए सीमा पुनः चिन्हित की गई और तारबंदी भी करवाई गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जो चार दीवारी का निर्माण किया जा रहा है, वह राजस्थान पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत लगभग 80 लाख रुपए की लागत से किया जा रहा है और करीब 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

नगर परिषद ने हमारी जमीन में बना दिया नाला

कमांडेंट ने स्पष्ट कहा कि यह पूरी तरह से सरकारी भूमि है और विभाग द्वारा किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद द्वारा बनाए गए नाले का कुछ हिस्सा भी प्रशिक्षण केंद्र की भूमि पर आता है, जिसके लिए पहले भूमि उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में नाले के पानी का प्रवाह रोके जाने से पानी आसपास फैल रहा है, जिससे स्थिति और जटिल हो रही है।

उच्च अधिकारियों से किया पत्राचार

कमांडेंड रविसिंह ने बताया कि कुल 1.56 हेक्टेयर भूमि प्रशिक्षण केंद्र को आवंटित है, जबकि 0.15 हेक्टेयर भूमि रिजर्व पुलिस लाइन की सीमा में चली गई है, जिसे वापस दिलाने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि 30 से 50 फीट भूमि भी कम हो जाती है तो प्रशिक्षण केंद्र के संचालन पर असर पड़ेगा। वैध निर्माण को अतिक्रमण बताकर तोड़ना गलत है।इस पूरे विवाद के बीच यह भी चर्चा है कि शहर के बीच स्थित इस बेशकीमती जमीन पर कहीं न कहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नजरें भी टिकी हुई हैं, जिसके चलते मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है और मौके पर पुलिस बल तैनात है। प्रशासनिक स्तर पर मामले के समाधान के प्रयास जारी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल