home page

संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन अभियान की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा : महानिदेशक ने दिए मिशन मोड में कार्य के निर्देश

 | 
संतुलित उर्वरक उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन अभियान की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा : महानिदेशक ने दिए मिशन मोड में कार्य के निर्देश


बीकानेर, 20 अप्रैल (हि.स.)। सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली डॉ. मांगी लाल जाट द्वारा “मेरा गांव मेरा गौरव (एमजीएमजी)” कार्यक्रम के तहत संतुलित फर्टिलाइज़र (उर्वरक) उपयोग एवं मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन अभियान कार्यक्रम की रूपरेखा हेतु आज उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीडीजी, एडीजी, विभिन्न आईसीएआर संस्थानों के निदेशक एवं वैज्ञानिक शामिल हुए, जिनमें राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक भी जुड़े।

बैठक में उच्चाधिकारियों ने जानकारी दी कि संस्थान स्तर पर एमजीएमजी टीमें गठित की जा चुकी हैं तथा गतिविधियों की रिपोर्टिंग गूगल फॉर्म के माध्यम से की जाएगी। महानिदेशक ने दैनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने तथा समेकित डेटा को डैशबोर्ड पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। इस अभियान तहत नियमित मॉनिटरिंग, डेटा समेकन, जनसंपर्क एवं समन्वित प्रयासों के माध्यम से इस अभियान को सफल बनाते हुए किसानों की आय वृद्धि, संसाधनों के संतुलित उपयोग एवं सतत कृषि विकास को नई दिशा दी जाएगी।

डॉ. जाट ने कहा कि शीघ्र ही प्रारम्भ होने वाले इस अभियान में वैज्ञानिकगण, गोद लिए गए गांवों में जाकर किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं आवश्यकता आधारित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा नई तकनीकों के प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की भागीदारी, सोशल मीडिया प्रचार-प्रसार तथा किसानों की सफलता की कहानियों के प्रसार पर विशेष जोर दिया। साथ ही, मानसून को ध्यान में रखते हुए समय पर कृषि परामर्श देने और वैज्ञानिक तकनीकों को खेत तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि चुनौतियों को अवसर के रूप में लेकर विज्ञान की उपयोगिता को प्रदर्शित करना होगा तथा जैविक एवं वैकल्पिक समाधानों को बढ़ावा देना चाहिए।

बैठक उपरांत एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने संस्थान स्तर पर इस अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन की प्रतिबद्धता व्यक्त की। वहीं केन्द्र के डॉ. राकेश रंजन, प्रधान वैज्ञानिक ने इसे किसानों के लिए उपयोगी बताते हुए मिशन मोड में कार्य करने पर बल दिया।

इस अवसर पर केन्द्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक (एग्रोनॉमी) एवं नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका गौतम ने बताया कि अभियान के सफल संचालन हेतु संस्थान में दो वैज्ञानिक टीमें गठित की गई हैं, जो गोद लिए गए गांवों में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं कम उर्वरक मांग वाली फसलों के प्रति जागरूक करेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि टीमें किसानों को आवश्यकता आधारित उर्वरक उपयोग, फसल चयन तथा उत्पादन सुधार के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। अभियान के समन्वयक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वेद प्रकाश ने भी अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन केे लिए विस्तृत चर्चा की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव