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डूंगरपुर जिले के अस्पतालों में शुरू हुई ऑनलाइन पंजीयन और डिजिटल टोकन की सुविधा; मरीजों को लंबी लाइनों से मिलेगी राहत

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डूंगरपुर जिले के अस्पतालों में शुरू हुई ऑनलाइन पंजीयन और डिजिटल टोकन की सुविधा; मरीजों को लंबी लाइनों से मिलेगी राहत


डूंगरपुर जिले के अस्पतालों में शुरू हुई ऑनलाइन पंजीयन और डिजिटल टोकन की सुविधा; मरीजों को लंबी लाइनों से मिलेगी राहत


डूंगरपुर, 14 अगस्त (हि.स.)। जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और

उनके परिजनों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के

तहत अब जिले के राजकीय चिकित्सालयों, उप जिला अस्पतालों, सामुदायिक

स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर ऑनलाइन

ओपीडी पंजीयन तथा डिजिटल टोकन की आधुनिक सुविधा का शुभारंभ कर दिया गया है। इस नई

व्यवस्था के लागू होने से अस्पतालों की पर्ची खिड़कियों पर लगने वाली लंबी कतारों

और घंटों की प्रतीक्षा से मरीजों को निजात मिलने की पूरी उम्मीद है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू की गई इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत,

अब

मरीजों या उनके तीमारदारों को पंजीयन काउंटर पर लंबी लाइनों में लगने की आवश्यकता

नहीं होगी। अस्पताल परिसर में विभिन्न स्थानों पर विशेष क्यूआर कोड चस्पा किए गए

हैं। मरीज या उनके परिजन अपने स्मार्टफोन से इन क्यूआर कोड को स्कैन कर अपनी

आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकते हैं। विवरण दर्ज होते ही ऑनलाइन ओपीडी पर्ची और

डिजिटल टोकन जेनरेट हो जाता है, जिससे पूरी प्रक्रिया बेहद आसान, पारदर्शी

और त्वरित हो गई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अलंकार गुप्ता ने इस संबंध

में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि एबीडीएम के तहत अस्पतालों में क्यूआर

कोड डिसप्ले किए गए हैं। मोबाइल के जरिए ओपीडी पर्ची बनने से काउंटर पर अनावश्यक

भीड़भाड़ पर अंकुश लगेगा और पंजीयन प्रक्रिया बेहद सुचारू रूप से संचालित होगी।

उन्होंने बताया कि इस तकनीक से न सिर्फ मरीजों के समय की बचत होगी, बल्कि

अस्पताल प्रबंधन को भी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने में मदद मिलेगी।

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से

मरीज की ओपीडी संबंधी जानकारी और उनका संपूर्ण स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से

सुरक्षित हो जाता है। भविष्य में इलाज के दौरान या डॉक्टर से परामर्श के वक्त मरीज

के पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आसानी से एक्सेस किया

जा सकेगा। इससे मरीजों को अपने साथ भारी-भरकम कागजी दस्तावेज या पुरानी फाइलें

लेकर घूमने की आवश्यकता से भी मुक्ति मिल जाएगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल पहल से जिले की

स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर काफी सुधरेगा। इससे निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलने की

संभावना है। पर्ची काउंटर पर भीड़ कम होने से समय की भारी बचत होगी। समय पर पंजीयन

होने से मरीजों की डॉक्टर तक पहुंच सुगम होगी और उपचार प्रक्रिया में तेजी आएगी।

डिजिटल टोकन व्यवस्था से मरीजों को अपनी बारी आने की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

भविष्य के चिकित्सकीय परामर्श और जांच रिपोर्टों का डिजिटल रखरखाव संभव हो सकेगा।

इस नई

डिजिटल व्यवस्था के शुरू होने से जिले के आम नागरिकों और दूर-दराज से आने वाले

मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में अभूतपूर्व सुविधा मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष