ब्रज भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
धौलपुर, 01 जून (हि.स.)। पूर्वी राजस्थान के आठ जिलों के करीब 16 लाख बच्चों के सामने भाषा की पहचान को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रमों में शामिल किए जाने की चल रही प्रक्रिया के बीच अब ब्रज क्षेत्र के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। इसी विरोध के तहत सोमवार को धौलपुर जिले के सरमथुरा में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिक और युवा एकत्रित हुए। सभी ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें ब्रज भाषा के अस्तित्व को बचाने और इसे उचित सम्मान देने की मांग की गई है।
बसेडी के पूर्व विधायक सुखराम कोली ने बताया कि ब्रज, ढूंढाढ़ी, मारवाड़ी, मेवाती एवं मालवी आदि हिंदी भाषा की ही अंग हैं। किसी एक भाषा को बढ़ावा मिलने से क्षेत्रीय असंतुलन होगा। क्षेत्रीय विश्वविद्यालयों में अतिरिक्त सब्जेक्ट के रूप में स्थानीय भाषा को शामिल कर सकते हैं। पूर्वी राजस्थान में करीब 12 लाख विद्यार्थी और 4 लाख प्रतियोगी परीक्षार्थी हैं। राजस्थानी भाषा इनकी समझ से परे है। यदि प्रतियोगी परीक्षाओं अथवा प्रशासनिक कार्यों में राजस्थानी (मारवाड़ी) को विशेष महत्व दिया गया, तो पूर्वी राजस्थान के बच्चे पिछड़ जाएंगे। ज्ञापन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से निवेदन किया गया है कि पूर्वी राजस्थान युवाओं के भविष्य के बारे में विचार-विमर्श करें और उच्च स्तरीय समिति बनाकर पूर्वी राजस्थान के भाषाओं, संस्कृति, रीति-रिवाजों, भौगोलिक - सांस्कृतिक, राजनीतिक परिस्थितियों का आंकलन किया जाए। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मातृभाषा आधारित शिक्षा संबंधी निर्देशों के क्रम में पूर्वी राजस्थान की स्थानीय भाषाई परिस्थिति के अनुरूप नीति निर्धारण करने की कृपा करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रदीप

