रवि पुष्य नक्षत्र पर गणेश मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु
जयपुर, 01 नवंबर (हि.स.)। रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के विशेष संयोग पर रविवार को राजधानी के गणेश मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का उल्लास नजर आया। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर, चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर और ब्रह्मपुरी के नहर के गणेशजी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, पंचामृत अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान हुए। धनतेरस से पहले शुभ मुहूर्त में वाहन खरीदने और पूजन कराने के लिए भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में दोपहिया और चौपहिया वाहनों की कतारें जेएलएन मार्ग तक नजर आईं।
प्रथम पूज्य मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में महंत कैलाश शर्मा के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश का पंचामृत अभिषेक किया गया। इसमें 151 किलो दूध, 21 किलो दही, 5.25 किलो घी, 21 किलो बूरा, शहद, केवड़ा और गुलाब जल का उपयोग किया गया। अभिषेक के बाद गणपति सहस्रनाम पाठ के साथ भगवान को 1008 मोदक अर्पित किए गए। भगवान को नवीन जरदोजी की पोशाक धारण करवाकर स्वर्ण मुकुट से शृंगार किया गया और फूल बंगले में विराजमान किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। भक्तों को नि:शुल्क रक्षासूत्र भी वितरित किए गए। वाहन पूजन के लिए मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गईं।
चांदपोल स्थित परकोटा गणेश मंदिर में भी पुष्य नक्षत्र पर विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। महंत पंडित अमित शर्मा के सान्निध्य में भगवान गणेश का 101 किलो दूध और पंचामृत से अभिषेक किया गया। दूध, दही, शहद, गंगाजल, केवड़ा, गुलाब जल और केसर जल से भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद गणपति सहस्रनामावली से हवन कर 1008 मोदकों की आहुति दी गई। गणेशजी को सिंदूर का चोला चढ़ाकर नवीन पोशाक धारण करवाई गई। गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ के साथ पूजा-अर्चना हुई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को गणेशजी और लक्ष्मी स्वरूप हल्दी की गांठ तथा सुपारी वितरित की गई। भगवान को दूर्वा अर्पित कर भक्तों ने सुख-समृद्धि की कामना की।
ब्रह्मपुरी माउंट रोड स्थित अतिप्राचीन दाहिनी सूंड दक्षिणमुखी श्री नहर के गणेशजी मंदिर में भी रवि पुष्य नक्षत्र पर विशेष अनुष्ठान हुआ। मंदिर युवाचार्य पंडित मानव शर्मा ने बताया कि शुभ मुहूर्त में मंदिर महंत पंडित जय शर्मा के सान्निध्य में मंदिर परिवार की ओर से भगवान गजानन का दूर्वा मार्जन से पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद गणपतिजी को नवीन पोशाक धारण करवाकर पूजा-अर्चना और आरती की गई। शाम को 251 दीपकों से महाआरती की गई। मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि और विघ्न निवारण के प्रतीक रक्षासूत्र वितरित किए गए।
मौसम में बदलाव के साथ मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में भगवान की भोग सेवा में भी मौसमी परिवर्तन शुरू हो गया है। महंत कैलाश शर्मा ने बताया कि शीत ऋतु की शुरुआत को देखते हुए भगवान के इत्र में बदलाव किया गया है। अब सर्दियों में विशेष सुगंध वाला इत्र लगाया जाएगा, जो गर्माहट का एहसास कराएगा। इसके साथ ही भोग में गर्म तासीर वाले व्यंजन शामिल किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भगवान गणेश को चोले की दाल और मूंग की दाल की पकौड़ियों का विशेष भोग लगाया गया। इन्हें तिल्ली यानी तिल के तेल में तला गया। सर्दियों के अनुकूल यह भोग स्वादिष्ट और पौष्टिक है।
दीपावली पर्व को देखते हुए मोतीडूंगरी गणेश मंदिर परिसर में विशेष सजावट और रोशनी की तैयारियां की जा रही हैं। आगामी एक-दो दिन में तैयारियां शुरू होंगी। पर्व पर मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा।
इसके अलावा जयपुर के सूरजपोल बाजार के मंदिर श्री श्वेत सिद्धिविनायक में श्री सिद्धिविनायक जी का वेद मंत्रों से दुग्धाभिषेक किया गया। गलता गेट स्थित गीता गायत्री गणेश मंदिर में सान्निध्य में अभिषेक किया गया। बड़ी चौपड़ स्थित ध्वजा धीश, चौड़ा रास्ता स्थित काले गणेशजी मंदिर, दिल्ली रोड स्थित आत्माराम गणेश ब्रह्मचारी मंदिर, आगरा रोड स्थित गंगोत्री गणेश मंदिर सहित अन्य गणेश मंदिरों में भी रवि पुष्य नक्षत्र में प्रथम पूज्य का अभिषेक किया गया।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

