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साइबर मनचलों की अब खैर नहीं: पुलिस ने की 698 सिम ब्लॉक, अब हैंडसेट की बारी

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साइबर मनचलों की अब खैर नहीं: पुलिस ने की 698 सिम ब्लॉक, अब हैंडसेट की बारी


जयपुर, 03 सितंबर (हि.स.)। महिलाओं और युवतियों को मोबाइल कॉल, संदेश और सोशल मीडिया के जरिए परेशान करने वाले साइबर मनचलों पर अब राजस्थान पुलिस डिजिटल कार्रवाई करेगी। ऐसे लोगों के मोबाइल सिम और जरूरत पड़ने पर मोबाइल हैंडसेट भी बंद कराए जाएंगे। सोशल मीडिया खातों की गतिविधियों पर डिजिटल निगरानी रखने के साथ ही शिकायत सही पाए जाने और मामला गंभीर होने पर स्थानीय थाने में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जाएगी।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच महिलाओं और युवतियों के मोबाइल नंबर हासिल कर उन्हें लगातार फोन और संदेश करने, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक या अश्लील संदेश भेजने तथा फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने अब शिकायतों के साथ-साथ इनके पीछे छिपे पैटर्न और आपसी संबंधों की भी जांच शुरू की है।

एसपी साइबर अपराध सुमित मेहरड़ा ने बताया कि राजस्थान साइबर पुलिस ने अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक प्रदेशभर में सामने आई ऐसी 5100 शिकायतों का डेटा जांच के दायरे में लिया है। इनमें इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों की जांच के बाद अब तक 698 मोबाइल सिम बंद कराई जा चुकी हैं।

पुलिस की कार्रवाई की खास बात यह है कि किसी एक शिकायत तक सीमित रहने के बजाय डेटा का विश्लेषण कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं एक ही मोबाइल नंबर से कई महिलाओं और युवतियों को तो परेशान नहीं किया जा रहा। एक ही नंबर के खिलाफ अलग-अलग जिलों में शिकायतें होने और अलग-अलग मोबाइल नंबर या सोशल मीडिया खातों के पीछे एक ही व्यक्ति के सक्रिय होने की आशंका की भी तकनीकी स्तर पर जांच की जा रही है।

साइबर अपराध शाखा सोशल मीडिया पर महिलाओं को आपत्तिजनक संदेश भेजने और टिप्पणी करने वालों की भी जांच कर रही है। शिकायतों में सामने आए मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया खातों की डिजिटल गतिविधियों पर साइबर फॉरेंसिक के जरिए नजर रखी जा रही है। जांच में शिकायत सही पाए जाने और मामले की गंभीरता की पुष्टि होने पर संबंधित सिम बंद कराई जा रही है।

अब पुलिस ऐसे मामलों में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल हैंडसेट को भी जांच के दायरे में ले रही है। घटनाओं की पुनरावृत्ति सामने आने पर मोबाइल हैंडसेट को भी बंद कराने की कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में स्थानीय पुलिस को सूचना देकर मुकदमा दर्ज कराने और आरोपित की गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के अनुसार ऐसी शिकायतों की जांच तीन स्तर पर की जा रही है। सबसे पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत और आरोपों का सत्यापन कराया जाता है। इसके बाद आरोपों की पुष्टि और मामले की गंभीरता के आधार पर मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। पुरानी शिकायतों को भी जांच के दायरे में लिया जा रहा है।

राजस्थान साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आर4सी) के जरिए शिकायतों के डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जिला साइबर टीमों की मदद से तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच कराई जा रही है। आवश्यकता होने पर स्थानीय थाना पुलिस के माध्यम से मुकदमा दर्ज कराकर गिरफ्तारी समेत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

साइबर अपराध शाखा के अनुसार महिलाओं और युवतियों को डिजिटल माध्यम से प्रताड़ित करने वालों पर चौतरफा कार्रवाई की तैयारी है। पहले मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया खाते की गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। शिकायत की पुष्टि होने पर सिम बंद कराने के साथ ही मोबाइल हैंडसेट को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा। सोशल मीडिया खातों की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।

पुलिस ने महिलाओं और युवतियों से अपील की है कि मोबाइल कॉल, संदेश या सोशल मीडिया के जरिए परेशान किए जाने की स्थिति में शिकायत को नजरअंदाज न करें। साइबर अपराध या डिजिटल उत्पीड़न की शिकायत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज कराई जा सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश