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रचनात्मक शिक्षण ही एआई युग में शिक्षक की पहचान बनेगा - कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल

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रचनात्मक शिक्षण ही एआई युग में शिक्षक की पहचान बनेगा - कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल


रचनात्मक शिक्षण ही एआई युग में शिक्षक की पहचान बनेगा - कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल


अजमेर, 23 अप्रैल (हि.स.)। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में आयोजित सहगामी कार्यक्रमों के अंतर्गत गुरुवार को विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां संपन्न हुईं। इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि रचनात्मक शिक्षण ही एआई युग में शिक्षक की पहचान बनेगा और एकतरफा (वन-वे) शिक्षण के बजाय संवादात्मक शिक्षा ही भविष्य का मार्ग है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में कक्षाओं की एक प्रमुख समस्या यह है कि विद्यार्थी केवल औपचारिक उपस्थिति तक सीमित रह जाते हैं, जबकि वास्तविक शिक्षा तभी संभव है जब वे सक्रिय भागीदारी करें। शिक्षण को शिक्षक और विद्यार्थी के बीच द्विपक्षीय संवाद के रूप में विकसित करना आवश्यक है। जब तक विद्यार्थी प्रश्न नहीं पूछेंगे, अपने विचार व्यक्त नहीं करेंगे और गतिविधियों में भाग नहीं लेंगे, तब तक प्रभावी शिक्षण संभव नहीं है।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने सहगामी गतिविधियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और आलोचनात्मक सोच विकसित करने का सशक्त साधन हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सीखने के प्रति प्रेरित करना और उनकी क्षमताओं को निखारना भी है। उन्होंने भावी शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तेजी से शिक्षा क्षेत्र में स्थान बना रही है। ऐसे में शिक्षकों के सामने चुनौती है कि वे विद्यार्थियों को ऐसा ज्ञान और कौशल दें, जो केवल तकनीक से प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि शिक्षण केवल जानकारी देने तक सीमित रह गया, तो उसकी प्रासंगिकता कम हो जाएगी। इसलिए शिक्षण को अधिक रचनात्मक, संवादात्मक और अनुभवात्मक बनाना आवश्यक है।

प्रो. अग्रवाल ने यह भी कहा कि विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि को लेकर किसी प्रकार का पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थी भी उतने ही प्रतिभाशाली होते हैं, उन्हें उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। एक सफल शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, सृजनात्मकता और आत्मविश्वास का विकास कर सके।

शिक्षा विभाग के प्रभारी प्रो. सुभाष चंद्र ने बताया कि बी.एड. सत्र 2025-26 के विद्यार्थियों के लिए पाठ्य सहगामी गतिविधियों का आयोजन 20 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ शिक्षण प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न सांस्कृतिक एवं रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में निकिता सिंधी, नीलम कुमावत, गोविंद शर्मा, पायलनाथ, ममता गुर्जर, चंद्र प्रकाश रेगर, परशराम साहू, अक्षिता एवं जितेंद्र गुर्जर सहित बी.एड. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

ये गतिविधियां बी.एड. पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों का मूल्यांकन भी किया जाता है। आगामी दिनों में योग सत्र, श्रमदान और रिपोर्ट प्रस्तुतिकरण जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम में अतिथि शिक्षक के रूप में भावना गौड़, अनुराधा जैन, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. आशा सेन और डॉ. नेमचंद तंबोली उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजु अग्रवाल ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष