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गर्भ संस्कार भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर: कुलगुरु

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गर्भ संस्कार भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर: कुलगुरु


जोधपुर, 08 जुलाई (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के स्नातकोत्तर स्त्रीरोग एवं प्रसूति तंत्र विभाग तथा संवर्धिनी न्यास, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में गर्भसंस्कार विषय पर 15 दिवसीय सेमी-ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स का ऑनलाइन शुभारंभ बुधवार को किया गया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि गर्भसंस्कार भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिसका उद्देश्य केवल स्वस्थ शिशु का जन्म सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक एवं नैतिक रूप से उत्कृष्ट भावी पीढ़ी का निर्माण करना भी है।

उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आयुर्वेदीय सिद्धांतों के समन्वय के साथ गर्भसंस्कार की अवधारणा को समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम को संवर्धिनी न्यास नई दिल्ली की गर्भसंस्कार काउंसलर डॉ. श्वेता डांगरे, माधुरी सदाशिव मराठे दीदी ने भी संबोधित किया।

स्त्रीरोग एवं प्रसूति तंत्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ए. नीलिमा ने पाठ्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम के समापन पर डीन प्रोफेसर महेंद्र शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह, मीडिया प्रभारी प्रोफेसर दिनेश शर्मा, डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. आशा के.पी., डॉ. हेमंत कुमार मेनारिया, डॉ. दिव्या शर्मा, डॉ. सविता विश्नोई सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, प्रतिभागी एवं स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश