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केंद्रीय स्वास्थ्य परिषद सम्मेलन में गजेन्द्र सिंह खींवसर ने रखा राजस्थान का पक्ष, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए

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केंद्रीय स्वास्थ्य परिषद सम्मेलन में गजेन्द्र सिंह खींवसर ने रखा राजस्थान का पक्ष, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए


नई दिल्ली/ जयपुर, 29 जून (हि.स.)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन में राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, सतत विकास लक्ष्य-3 (एसडीजी-3), संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं तथा खाद्य एवं औषधि नियामकीय सुधारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर राज्य का पक्ष रखा।

विज्ञान भवन में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, राजस्थान सरकार ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत आधार है और इसके माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, संस्थागत प्रसव में वृद्धि, टीकाकरण कवरेज के विस्तार तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत प्रदेशवासियों को 25 लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा विशेष उपचार पैकेजों का विस्तार, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा तथा अंतरराज्यीय और राज्य के भीतर उपचार सुविधाओं को भी मजबूत किया गया है।

गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत राजस्थान में 7.22 करोड़ से अधिक आभा खाते बनाए जा चुके हैं तथा सभी सरकारी और अधिकांश निजी स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने कहा कि रामाश्रय वृद्धावस्था देखभाल मॉडल, मिशन मधुहारी, 6,547 टीबी-मुक्त ग्राम पंचायतें, तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा सम्मानित पहल, मां नेत्र वाउचर योजना, एफसीएम पिंक पखवाड़ा तथा मां वाउचर योजना के तहत 4.5 लाख से अधिक निःशुल्क सोनोग्राफी सेवाएं राज्य की प्रमुख स्वास्थ्य उपलब्धियों में शामिल हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने, गैर-संचारी रोगों एवं मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि फिजियोथेरेपिस्ट, मेडिकल लैब प्रोफेशनल, रेडियोग्राफर, ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजिस्ट, आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के महत्वपूर्ण अंग हैं। इनके प्रशिक्षण, क्षमता विकास, रोजगार अवसरों के विस्तार और जिला व प्राथमिक स्तर पर प्रभावी तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

गजेन्द्र सिंह खींवसर ने स्वास्थ्य सेवाओं पर नागरिकों के प्रत्यक्ष व्यय को कम करने के लिए निःशुल्क दवा, निःशुल्क जांच और वित्तीय सुरक्षा योजनाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियमन के संबंध में उन्होंने कहा कि सुरक्षित खाद्य पदार्थ और गुणवत्तापूर्ण दवाएं जनस्वास्थ्य की आधारशिला हैं। राजस्थान खाद्य सुरक्षा निगरानी, प्रयोगशालाओं की क्षमता वृद्धि, आधुनिक नियामकीय व्यवस्था, जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली तथा दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सुधारों का पक्षधर है। उन्होंने केंद्र सरकार से स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने, मानव संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, संबद्ध स्वास्थ्य कार्यबल के विकास तथा खाद्य एवं औषधि नियामकीय प्रणाली के आधुनिकीकरण में निरंतर सहयोग का आग्रह किया। साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्यों को अधिक लचीलापन प्रदान करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

अपने संबोधन के समापन पर गजेन्द्र सिंह खींवसर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, राजस्थान सरकार ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय तथा सहकारी संघवाद की भावना के साथ देश में एक सुदृढ़, समावेशी और जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा सकेगा, जो सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक