नुकसान के लिए वैज्ञानिक मानचित्रण की आवश्यकता : मंजू राजपाल
जोधपुर, 07 मार्च (हि.स.)। प्रधान सचिव (कृषि) मंजू राजपाल और आयुक्त (बागवानी) शुभम चौधरी ने केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान काजरी का दौरा किया। उन्होंने शुष्क क्षेत्र में चल रहे कृषि अनुसंधान एवं विकास कार्यों की समीक्षा की। राज्य सरकार के कृषि विभाग के अधिकारी भी उनके साथ थे।
कार्यवाहक निदेशक डॉ. प्रियब्रत सांतरा ने संस्थान के महत्वपूर्ण अनुसंधान कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने किसानों के लिए आवश्यक नवाचारों के बारे में जानकारी दी। काजरी के वैज्ञानिकों ने प्रधान सचिव को शुष्क कृषि पर संस्थान की अनुसंधान पहलों के बारे में जानकारी दी, जिनमें सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों, संकर फसलों, जीरे की नई किस्मों का विकास, शुष्क बागवानी फसलों को बढ़ावा देना और कृषि वानिकी प्रणालियों का उपयोग, इन-सीटू बडिंग शामिल हैं।
प्रधान सचिव ने वैज्ञानिकों और अधिकारियों से बातचीत करते हुए काजरी के अनुसंधान कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बागवानी अब पसंदीदा फसल है, लेकिन कम नमी, जलवायु परिवर्तन, अनावश्यक बारिश और गर्मी के कारण होने वाले नुकसान के लिए वैज्ञानिक मानचित्रण की आवश्यकता है। प्रधान सचिव ने काजरी के वर्षा जल संचयन मॉडल की सराहना की।
उन्होंने राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में किसानों तक उन्नत प्रौद्योगिकियों, कुशल जल प्रबंधन पद्धतियों और जलवायु-अनुकूल कृषि प्रणालियों को पहुंचाने के लिए काजरी और अनुसंधान संस्थानों तथा राज्य कृषि विभाग के बीच सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया, जिससे उत्पादकता, स्थिरता और किसानों की आय में सुधार हो सके।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

