राजस्थान की वीर बेटी अंशु राठौड़ को नम आंखों से विदाई, सैन्य सम्मान से हुआ अंतिम संस्कार
नागौर, 06 अप्रैल (हि.स.)। इंडियन नेवी में सब लेफ्टिनेंट पद पर तैनात राजस्थान की बेटी अंशु राठौड़ (23) को सोमवार को उनके पैतृक गांव बिठुड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट पद पर तैनात अंशु का रविवार को गुजरात के जामनगर में एक सड़क हादसे में निधन हो गया था।
अंशु की पार्थिव देह सोमवार को डीडवाना पहुंची, जहां से उनके गांव बिठुड़ा तक करीब 14 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों और युवाओं ने देशभक्ति नारों के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव पहुंचने पर पार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित किए गए और घर से मुक्ति धाम तक करीब एक किलोमीटर की अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा। इस दौरान हर आंख नम थी और माहौल गमगीन हो गया।
अंतिम संस्कार के दौरान अंशु के छोटे भाई भूपेश सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस अवसर पर मौजूद नौसेना अधिकारियों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ श्रद्धांजलि देते हुए तिरंगा उनके पिता किशन सिंह को सौंपा।
जानकारी के अनुसार अंशु राठौड़ रविवार सुबह पुणे से अपनी अगली पोस्टिंग के लिए आईएनएस वलसुरा (जामनगर, गुजरात) जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में उनकी कार की दूसरी गाड़ी से टक्कर हो गई। हादसे में गंभीर चोटें लगने से उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
पिता किशन सिंह ने भावुक होकर बताया कि अंशु ने वर्ष 2024 में पहले ही प्रयास में भारतीय नौसेना में सब लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त किया था। परिवार की पांच पीढ़ियों में वह पहली बेटी थीं, जिन्होंने सेना में यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने कहा कि अंशु का सपना आगे चलकर आईएएस या आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का था।
उन्होंने कहा कि बेटी को खोने का दुख है, लेकिन उसकी देशभक्ति और जज्बे पर हमेशा गर्व रहेगा।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि अंशु के दादा और पिता दोनों ही भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं। वर्तमान में उनके पिता जयपुर में आबकारी विभाग में कार्यरत हैं। अंशु हाल ही में विशाखापट्टनम और मुंबई में सेवाएं देने के बाद पुणे में प्रशिक्षण ले रही थीं और वहीं से नई ड्यूटी के लिए रवाना हुई थीं। महज 23 वर्ष की आयु में देश सेवा करते हुए अंशु राठौड़ का असमय निधन पूरे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रतीक रहा कि प्रदेश अपनी इस वीर बेटी को कभी नहीं भूलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

