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विला-कॉटेज खरीद मामले में बेनीवाल ने मांगी सीबीआई-ईडी जांच

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विला-कॉटेज खरीद मामले में बेनीवाल ने मांगी सीबीआई-ईडी जांच


जयपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी आईपीएस पत्नी प्रशाखा माथुर के परिवार से जुड़े विला-कॉटेज खरीद मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की है।

बेनीवाल ने शुक्रवार को सवाल उठाया कि करीब 40 विला-कॉटेज की खरीद और 1.80 करोड़ रुपए सालाना लीज से जुड़े मामले में वास्तविक निवेशक कौन है। इन संपत्तियों का बाजार मूल्य कितना है और खरीद के लिए धन कहां से आया? उन्होंने परिवार के सदस्यों के नाम पर हुई खरीद, भुगतान के स्रोत और वास्तविक निवेशक की भूमिका की विस्तृत जांच कराने की मांग की।

बेनीवाल ने कहा कि सरकार ने शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया, लेकिन केवल पद से हटाना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल में अग्रवाल मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल के दौरान संबंधित कंपनी या कारोबारी समूहों को किसी तरह का प्रशासनिक लाभ पहुंचाए जाने की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने उद्योग विभाग, रीको और निवेश संवर्धन से जुड़े फैसलों को भी जांच के दायरे में शामिल करने की मांग की।

आरएलपी सुप्रीमो ने पत्र में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ का नाम भी शामिल किया। बेनीवाल ने कहा कि विला-कॉटेज मामले को लेकर सार्वजनिक चर्चाओं में राठौड़ का नाम सामने आ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमएलए लैड) में कथित 40 प्रतिशत कमीशनखोरी का मुद्दा उठाते हुए भाजपा विधायकों से जुड़े आरोपों और कथित वीडियो का भी उल्लेख किया। उनका आरोप है कि सरकार ने जांच और कार्रवाई के दावे किए, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

बेनीवाल ने सीबीआई से समयबद्ध जांच कराने, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और डीओपीटी से संबंधित अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड व संपत्ति विवरण की समीक्षा कराने तथा आयकर विभाग से वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कराने की मांग की है। इसके अलावा बेनामी संपत्ति कानून के तहत जांच, सीएमओ, उद्योग विभाग और रीको के फैसलों की समीक्षा तथा संपत्तियों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि जांच केवल संपत्तियों की रजिस्ट्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि कथित राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक फैसलों की भी पड़ताल होनी चाहिए। दोष साबित होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश