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जौ अनुसंधान को मिलेगा नया केंद्र, दुर्गापुरा में खुलेगा परियोजना समन्वयक प्रकोष्ठ

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जौ अनुसंधान को मिलेगा नया केंद्र, दुर्गापुरा में खुलेगा परियोजना समन्वयक प्रकोष्ठ


जयपुर, 19 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में जौ की फसल के अनुसंधान एवं विकास को नई गति देने के लिए राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में परियोजना समन्वयक प्रकोष्ठ खोला जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने बुधवार को इसकी घोषणा की।

राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में आयोजित 65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यशाला के दूसरे दिन गेहूं एवं जौ अनुसंधान कार्यकर्ता बैठक हुई। बैठक में देशभर से आए वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने गेहूं एवं जौ की उत्पादकता व गुणवत्ता बढ़ाने, बदलती जलवायु के अनुरूप फसल सुधार, मृदा एवं जल संरक्षण तथा वर्ष 2047 तक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने की भावी अनुसंधान रणनीति पर मंथन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. एम. एल. जाट ने गेहूं एवं जौ अनुसंधान को और मजबूत करने पर जोर देते हुए राजस्थान में विभिन्न फसलों के लिए नए अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान केंद्र स्थापित करने तथा वर्तमान केंद्रों को सुदृढ़ करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विज्ञान आधारित, टिकाऊ और संसाधन-दक्ष कृषि प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है।

इसी क्रम में उन्होंने दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान में जौ की फसल को बढ़ावा देने के लिए परियोजना समन्वयक प्रकोष्ठ खोलने की घोषणा की। इससे जौ अनुसंधान, वैज्ञानिक समन्वय और तकनीकी गतिविधियों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने जलवायु परिवर्तन, मृदा में बढ़ती क्षारीयता, दोहरे उद्देश्य वाली जौ की किस्मों, जैविक उत्पादन तथा जैव-सुदृढ़ीकृत किस्मों को अनुसंधान की प्राथमिकता में शामिल करने पर बल दिया। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय की अनुसंधान उपलब्धियों और विकसित उन्नत किस्मों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में विभिन्न अनुसंधान केंद्रों की टीमों को नवीन गेहूं एवं जौ की किस्मों के विकास में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। तकनीकी एवं प्रयोगात्मक पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। सर्वश्रेष्ठ अखिल भारतीय समन्वित गेहूं अनुसंधान परियोजना पुरस्कार जूनागढ़ केंद्र को प्रदान किया गया। कृषि अनुसंधान एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. एम. एल. जाट को वी. एस. माथुर स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत अतिथियों ने संस्थान परिसर में पौधारोपण भी किया।

बैठक में कृषि विश्वविद्यालय कोटा की कुलगुरु डॉ. विमला डूकवाल, पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलगुरु डॉ. त्रिभुवन शर्मा, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह सहित विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, वैज्ञानिक और देशभर से आए गेहूं एवं जौ अनुसंधान केंद्रों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश