home page

पुतला जलाने से नहीं मिटेंगी बुराइयां—मन के रावण का करना होगा अंत : बाबा उमाकांत

 | 
पुतला जलाने से नहीं मिटेंगी बुराइयां—मन के रावण का करना होगा अंत : बाबा उमाकांत


जयपुर, 20 अक्टूबर (हि.स.)। संत बाबा उमाकांत महाराज ने दशहरा 2026 के अवसर पर सत्संग में कहा कि आज जगह-जगह रावण के पुतले जलाए गए हैं, लेकिन समाज में रावण जैसी बुराइयां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने मांसाहार, जीव हत्या, शराब सेवन और व्यभिचार के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल पुतला दहन से बुराइयों का अंत नहीं होगा, बल्कि हर व्यक्ति को अपने भीतर की बुराइयों को दूर करना होगा।

महाराज ने कहा कि यह परिवर्तनशील संसार है और बुराई का अंत होकर अच्छाई आती है। लोगों को समझने की जरूरत है कि गलत कर्मों के परिणाम भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि आज घर-घर और जन-जन में रावण जैसी प्रवृत्तियां दिखाई देने लगी हैं, ऐसे में बच्चों और समाज के भविष्य की रक्षा के लिए नैतिक मूल्यों को अपनाना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही हैं और अकाल मृत्यु की घटनाएं बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, मनुष्य प्रकृति के नियमों और सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध आचरण करता है तो उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने ‘अकाल मृत्यु जग मांहि व्यापे, प्रजा बहुत मरे’ पंक्ति का उल्लेख करते हुए लोगों को अपने कर्मों पर विचार करने का संदेश दिया।

बाबा उमाकांत महाराज ने अनुयायियों से वक्त गुरु से नामदान लेकर बताई गई साधना करने और सेवा के मार्ग पर चलने की अपील की। उन्होंने कहा कि साधना और सेवा के माध्यम से अपने कर्मों को सुधारने का अवसर है, इसलिए इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। दशहरे के अवसर पर उन्होंने लोगों से बुराइयों का त्याग कर सदाचार अपनाने और अपने आचरण में बदलाव लाने का आह्वान किया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश