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अनुपयोगी रेलवे पुर्जों से तैयार की गई आकर्षक कलाकृतियां,: कबाड़ को बनाया आकर्षण का केंद्र, ‘वेस्ट टू आर्ट’ की अनूठी पहल

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अनुपयोगी रेलवे पुर्जों से तैयार की गई आकर्षक कलाकृतियां,: कबाड़ को बनाया आकर्षण का केंद्र, ‘वेस्ट टू आर्ट’ की अनूठी पहल


बीकानेर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। कैरिज एंड वैगन कारखाना लालगढ़, बीकानेर में अनुपयोगी समझे जाने वाले कबाड़ को रचनात्मकता और तकनीकी हुनर के माध्यम से आकर्षक कलाकृतियों में बदलकर नवाचार की अनूठी मिसाल प्रस्तुत की गई है। कारखाने में उपलब्ध पुराने एवं अनुपयोगी पुर्जों और धातु सामग्री का सदुपयोग करते हुए विभिन्न आकर्षक आकृतियां तैयार की गई हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने के साथ ही अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही हैं।

कारखाने में तैयार की गई कलाकृतियों में मोर, ऊंट, राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में महिला एवं पुरुष की आकृतियां, रॉकेट तथा तिरंगे के रंगों में भारत के मानचित्र जैसी रचनाएं विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इन कलाकृतियों में पुराने धातु पुर्जों, स्प्रिंग, नट-बोल्ट और अन्य अनुपयोगी सामग्री का रचनात्मक उपयोग किया गया है। इन कलाकृतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राजस्थान की लोक परंपरा, राष्ट्रीय गौरव और तकनीकी दक्षता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

रेलवे के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक वीरेंद्र जाेशी के अनुसार रेलवे के तकनीकी कार्यों के दौरान अनुपयोगी हो जाने वाले पुर्जों को बेकार समझकर अलग कर दिया जाता है, लेकिन रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल के जरिए इन्हीं सामग्रियों को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया जा सकता है। कैरिज एंड वैगन कारखाना, लालगढ़ की यह पहल इसी सोच को साकार करती है। इन कलाकृतियों का निर्माण संसाधनों के अधिकतम उपयोग, नवाचार और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

‘वेस्ट टू आर्ट’ की यह पहल स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करती है। कबाड़ का रचनात्मक उपयोग करने से अपशिष्ट सामग्री के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है तथा रेल परिसर के सौंदर्यीकरण में भी योगदान मिलता है। यह पहल संदेश देती है कि स्वच्छता का अर्थ केवल कचरे को हटाना ही नहीं, बल्कि अनुपयोगी सामग्री का जिम्मेदारीपूर्वक निस्तारण और जहां संभव हो, उसका उपयोगी एवं कलात्मक रूपांतरण करना भी है।

कैरिज एंड वैगन कारखाना, लालगढ़ की यह अभिनव पहल रेलवे कर्मचारियों की रचनात्मक प्रतिभा, तकनीकी दक्षता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को प्रदर्शित करती है। कबाड़ से तैयार ये कलाकृतियां इस बात का प्रमाण हैं कि सही सोच और हुनर के साथ अनुपयोगी वस्तुओं को भी आकर्षण, उपयोगिता और प्रेरणा का माध्यम बनाया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि कारखाने पर स्वच्छता पखवाड़ा- 2026 के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव