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पटाखों से आंखों में चोटिल बच्चों का हाेगा मुफ्त इलाज

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पटाखों से आंखों में चोटिल बच्चों का हाेगा मुफ्त इलाज


जयपुर, 04 नवंबर (हि.स.)। दीपावली पर पटाखों से होने वाली आंखों की चोटों से बच्चों की रोशनी बचाने के लिए एएसजी हॉस्पिटल लिमिटेड ने ‘सुरक्षित आंखें, सुरक्षित दिवाली’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत पटाखों से आंखों में चोट लगने पर 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का एएसजी आई हॉस्पिटल में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत उपचार किया जाएगा। अभियान 4 से 14 नवंबर 2026 तक देश के 95 से अधिक शहरों में स्थित 200 से अधिक अस्पताल केंद्रों पर संचालित होगा।

जयपुर के श्याम नगर स्थित एएसजी आई हॉस्पिटल में वरिष्ठ नेत्र चिकित्सकों डॉ. मुकेश पाटिल, डॉ. दिव्या सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार सुमन, डॉ. ध्रुव कामरा, डॉ. वात्सल्या वेंकटरमण और डॉ. स्वाति इंदुरख्या ने अभियान की जानकारी दी। चिकित्सकों ने आतिशबाजी के दौरान आंखों की सुरक्षा और दुर्घटना होने पर तत्काल किए जाने वाले चिकित्सा उपायों के बारे में बताया।

डॉ. मुकेश पाटिल, डॉ. दिव्या सिंह और डॉ. प्रमोद कुमार सुमन ने बताया कि अभियान का उद्देश्य बच्चों की आंखों को पटाखों से होने वाली चोटों से बचाना और दुर्घटना की स्थिति में समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। इसके तहत प्राथमिक उपचार, आपातकालीन नेत्र देखभाल, दवाइयां और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी की सुविधा मिलेगी। हालांकि, चश्मे सहित अन्य प्रकाशीय उत्पाद इस सुविधा में शामिल नहीं हैं। इसके लिए नियम और शर्तें लागू रहेंगी।

चिकित्सकों के अनुसार दीपावली के दौरान पटाखों से आंखों में चोट के मामले बढ़ जाते हैं और इनमें बच्चों की संख्या भी काफी होती है। कॉर्निया यानी आंख की पुतली और आंख के सामने के हिस्सों में चोट लगना आम है। समय पर नेत्र विशेषज्ञ से उपचार नहीं मिलने पर कुछ चोटें दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। चोट लगने के बाद शुरुआती कुछ घंटे उपचार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। पिछले साल दीपावली के दौरान एएसजी के विभिन्न केंद्रों पर पटाखों से आंखों में चोट लगने वाले 500 से अधिक बच्चों का उपचार किया गया था।

डॉ. ध्रुव कामरा, डॉ. वात्सल्या वेंकटरमण और डॉ. स्वाति इंदुरख्या ने बताया कि पटाखों से आंख में चोट लगने पर उसे रगड़ना या दबाना नहीं चाहिए। आंख में फंसे कण को खुद निकालने का प्रयास भी नहीं करना चाहिए। पानी की तेज धार से आंख धोने, काजल, मलहम, आई ड्रॉप या घरेलू उपायों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। बिना दबाव डाले किसी साफ शील्ड, जैसे पेपर कप के निचले हिस्से से आंख को हल्के से ढककर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। दोनों आंखों को यथासंभव स्थिर रखना भी जरूरी है।

चिकित्सकों ने लोगों को पटाखे चलाते समय सुरक्षित दूरी बनाए रखने, सुरक्षात्मक चश्मा पहनने और बच्चों को केवल वयस्कों की निगरानी में आतिशबाजी करने देने की सलाह दी। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में एएसजी की हेल्पलाइन 1800 1200 111 पर संपर्क किया जा सकता है। बच्चे को तुरंत नजदीकी एएसजी आई हॉस्पिटल, शार्प साइट आई हॉस्पिटल या किसी निकटतम नेत्र आपातकालीन केंद्र पर ले जाने की सलाह दी गई है। चिकित्सकों के अनुसार समय पर उपचार मिलने से बच्चे की आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश