राज्यपाल बागडे ने बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग में आयोजित समारोह में भाग लिया
जयपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बेंगलुरु स्थित 'आर्ट ऑफ लिविंग' की स्थापना के 45 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने 'आर्ट ऑफ लिविंग' के प्रणेता श्री श्री रविशंकर से संवाद करते हुए उनके 70 वें जन्मदिन को 'सुशासन, सामाजिक सामंजस्य, शांति और सतत विकास' के आलोक में समारोहपूर्वक मनाए जाने को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने श्री श्री रविशंकर जी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में मानवीय मूल्यों, शांति एवं सद्भाव के लिए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सनातन संस्कृति के प्रसार में रही उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति मानवीय मूल्यों पर ही जोर देती है।
उन्होंने ज्ञान परम्परा में श्री श्री रविशंकर जी के अवदान की चर्चा करते हुए कहा कि ज्ञान मृत्यु से भी नहीं डरता। उन्होंने कठोपनिषद में यम—नचिकता के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि ज्ञान परम्परा का अर्थ है, सतत चलने वाली दृष्टि। परम्परा का अर्थ जड़त्व नहीं बल्कि युगीन संदर्भों को सहेजते हुए जीवन के उदात्त मूल्यों का प्रसार है।
राज्यपाल बागडे ने इससे पहले बेंगलुरु स्थित 'आर्ट ऑफ लिविंग' इन्टरनेशनल आश्रम में गौशाला का भी अवलोकन किया और वहां संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी ली।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

