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मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर के उत्कृष्ट डिजाइन पर वास्तुकार प्रमोद जैन सम्मानित

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मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर के उत्कृष्ट डिजाइन पर वास्तुकार प्रमोद जैन सम्मानित


जयपुर/जोधपुर, 27 सितंबर (हि.स.)। राजस्थान के प्रख्यात वास्तुकार प्रमोद जैन को वास्तुकला एवं डिजाइन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘आर्किटेक्चर एक्सीलेंस रिकग्निशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान जोधपुर स्थित मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर के उत्कृष्ट वास्तुशिल्पीय डिजाइन के लिए प्रदान किया गया। चंडीगढ़ के होटल ताज में आयोजित राष्ट्रीय वास्तुकला पुरस्कार समारोह में राज्यसभा सदस्य सतनाम सिंह संधू ने उन्हें सम्मान प्रदान किया।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की ओर से आयोजित राष्ट्रीय आर्किटेक्चर अवार्ड्स के पांचवें संस्करण में देशभर से वास्तुकला और डिजाइन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों तथा पेशेवरों ने भाग लिया। प्रमोद जैन को ‘लार्ज सिविक बिल्डिंग्स’ श्रेणी में यह सम्मान मिला। पुरस्कार के लिए परियोजनाओं का चयन काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के पूर्व अध्यक्ष वास्तुकार हबीब खान की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने किया।

विशेषज्ञ समिति ने प्रमोद जैन के डिजाइन दृष्टिकोण, रचनात्मकता और नवाचार के साथ समकालीन भारतीय वास्तुकला में उनके योगदान को महत्वपूर्ण माना। मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर के डिजाइन में आधुनिक वास्तुकला के साथ राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है। यही कारण है कि एमआईसी का वास्तुशिल्पीय स्वरूप राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है।

आयोजकों के अनुसार राष्ट्रीय आर्किटेक्चर अवार्ड्स के लिए परियोजनाओं का मूल्यांकन व्यापक आधार पर किया गया। इसमें डिजाइन की अवधारणा, वास्तुशिल्पीय सौंदर्य, नवाचार, स्थायित्व, भवन के उपयोग और उसके प्रति सार्वजनिक स्वीकार्यता जैसे विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया।

प्रमोद जैन के लिए यह सम्मान वास्तुकला के क्षेत्र में लगातार मिल रही उपलब्धियों की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्हें वर्ष 2024 में राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर जयपुर के डिजाइन के लिए तथा 2025 में मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर जोधपुर के लिए लगातार दो वर्षों तक ‘डिजाइनस्केप अवार्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा वर्ष 2025 में एमआईस जोधपुर के लिए उन्हें एक लाख रुपए की पुरस्कार राशि वाला नेशनल स्टोन मार्ट अवार्ड भी प्रदान किया गया था।

प्रमोद जैन की वास्तुशिल्पीय यात्रा पांच दशक से भी अधिक लंबी है। इस दौरान उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण भवनों और संस्थागत परियोजनाओं की परिकल्पना एवं डिजाइन किया। उनके कार्यों में स्थानीय परिवेश, भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ, आधुनिक तकनीक और भवन की उपयोगिता के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिश दिखाई देती है।

जयपुर से शुरू हुई उनकी वास्तुशिल्पीय यात्रा राजस्थान से आगे देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंची। सार्वजनिक और सांस्कृतिक भवनों के डिजाइन के साथ उन्होंने राजस्थान की स्थापत्य परंपरा को आधुनिक वास्तुकला से जोड़ने का प्रयास किया। मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर के लिए मिला ‘आर्किटेक्चर एक्सीलेंस रिकग्निशन अवार्ड’ उनकी इसी लंबी रचनात्मक यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक और महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित