अरावली पर सुझाव के लिए दो घंटे की समय सीमा पर लोग नाराज
उदयपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और प्रस्तावित 100 मीटर की परिभाषा से जुड़े सुझाव एवं आपत्तियां सुनने के लिए उदयपुर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाईलेवल कमेटी की बैठक हुई। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की महानिदेशक कंचन देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पर्यावरणविदों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, खनन व्यवसायियों, एनजीओ प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। बैठक में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, लेकिन समय कम होने के कारण कई लोगों को अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल सका।
बैठक सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और दोपहर 12 बजे समाप्त हो गई। सभागार के अंदर क्षमता से अधिक लोग मौजूद थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग बाहर तंबू के नीचे और पोर्च में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। बैठक समाप्त होने पर कई लोगों ने विरोध जताते हुए कहा कि अरावली जैसे संवेदनशील और व्यापक विषय पर महज दो घंटे में सभी पक्षों की बात कैसे सुनी जा सकती है।
पीएचडी शोधार्थी निशाकर डामोर ने कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अरावली का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र में है और संरक्षण जैसे गंभीर विषय पर पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था।
पर्यावरणविदों ने अरावली के संरक्षण के लिए सख्त नियम और अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग की। डॉ. अनिल मेहता ने कहा कि उदयपुर की पहचान अरावली से है और माइनिंग तथा रियल एस्टेट के लिए अलग-अलग परिभाषाओं के बजाय समान नीति होनी चाहिए। पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल और अन्य विशेषज्ञों ने भी संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही। वहीं खनन उद्यमियों ने संरक्षण के साथ खनिज संसाधनों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति की मांग की। यूएफएमपी अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह सोनी ने कहा कि 97 प्रतिशत अरावली क्षेत्र संरक्षित रखते हुए सीमित और वैज्ञानिक खनन की व्यवस्था की जा सकती है। समिति ने विभिन्न पक्षों से ज्ञापन और सुझाव भी प्राप्त किए। बैठक में विधायक ताराचंद जैन, फूलसिंह मीणा, विश्वराज सिंह मेवाड़ सहित अधिकारी और बड़ी संख्या में हितधारक मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

