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अरावली की हाई पावर्ड कमेटी 11 अक्टूबर को डूंगरपुर में, प्रशासन ने तैयारियां तेज कीं

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अरावली की हाई पावर्ड कमेटी 11 अक्टूबर को डूंगरपुर में, प्रशासन ने तैयारियां तेज कीं


डूंगरपुर, 06 अक्टूबर (हि.स.)। अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर्ड कमेटी 11 अक्टूबर को डूंगरपुर पहुंचेगी। कमेटी 11 से 13 अक्टूबर तक दक्षिणी राजस्थान के वागड़ क्षेत्र का दौरा कर डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में पर्यावरण, खनन एवं अरावली क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों का जमीनी अध्ययन करेगी। कमेटी के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

कमेटी अहमदाबाद और मोडासा होते हुए 11 अक्टूबर को डूंगरपुर पहुंचेगी, जबकि 12 अक्टूबर को बांसवाड़ा का दौरा करेगी। दोनों जिलों में विभागीय अधिकारियों के साथ स्थानीय लोगों और विभिन्न हितधारकों से संवाद कर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का फीडबैक लिया जाएगा। इसके बाद 13 अक्टूबर को कमेटी उदयपुर के लिए रवाना होगी।

कमेटी के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला कलक्टर देशलदान ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्ययोजना तैयार रखने तथा कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज और सूचनाएं व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

जिला कलक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए निरीक्षण एवं सर्वेक्षण की अद्यतन जानकारी तैयार रखने को कहा। वन विभाग को वन खंडवार 100 मीटर से कम एवं अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से संबंधित जानकारी खनन विभाग के साथ साझा करने तथा दोनों विभागों के बीच आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पुलिस विभाग को कमेटी के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अन्य विभागों को भी अपनी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने को कहा गया। बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रकाश चंद्र रेगर, उपखंड अधिकारी डूंगरपुर सोनू कुमार गुर्जर, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेखा गोड सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

कमेटी में हाई पावर्ड कमेटी के सदस्यों के साथ विशेष आमंत्रित सदस्य एवं सहायक अधिकारियों सहित करीब 10 से 12 लोगों की टीम शामिल है। कमेटी पर्यावरणविदों, खनन पट्टाधारकों, किसानों, परियोजना प्रस्तावकों, खान श्रमिकों और स्थानीय लोगों से फीडबैक लेगी। इसके अलावा वन, जल संसाधन, राजस्व, कृषि, ग्रामीण विकास और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों से भी जानकारी ली जाएगी।

फील्ड विजिट के दौरान कमेटी पर्यावरण, अरावली क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक संरचना, जल संसाधनों, जैव विविधता, खनन गतिविधियों, भूमि उपयोग तथा स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़े पहलुओं का जमीनी आकलन करेगी। इसका उद्देश्य अरावली क्षेत्र में संरक्षण और विकास गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर वास्तविक परिस्थितियों को समझना है।

सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई 2026 को अरावली पहाड़ियों की परिभाषा तय करने और इनके संरक्षण से जुड़े विषयों के अध्ययन के लिए हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था। कमेटी निर्धारित कार्यक्रम के तहत 8 से 13 अक्टूबर तक गुजरात और दक्षिणी राजस्थान के अरावली क्षेत्र का दौरा कर रही है। इससे पहले कमेटी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के अरावली क्षेत्रों का भी दौरा कर चुकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष