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खरीफ-2026 के लिए बीटी कपास हाइब्रिड बीजों की बिक्री को मंजूरी, 34 कंपनियों को अनुमति

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खरीफ-2026 के लिए बीटी कपास हाइब्रिड बीजों की बिक्री को मंजूरी, 34 कंपनियों को अनुमति


जयपुर, 20 अप्रैल (हि.स.)। राज्य सरकार ने खरीफ-2026 सीजन के लिए गैर-संशोधित (BG-II, GFM) बीटी कपास हाइब्रिड बीजों की व्यावसायिक बिक्री की औपचारिक अनुमति जारी कर दी है। यह अनुमति केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) तथा बीटी कपास पर स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर दी गई है।

इस निर्णय के तहत अनुमोदित 34 बीज कंपनियाँ राज्य के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में निर्धारित शर्तों के अनुरूप बीटी कपास हाइब्रिड बीजों की आपूर्ति कर सकेंगी।

आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रत्येक हाइब्रिड का प्रदर्शन कृषि-जलवायु क्षेत्रवार एटीसी, एआरएस एवं केवीके फार्मों पर अनिवार्य परीक्षण के माध्यम से परखा जाएगा। बीज कंपनियाँ 30 अप्रैल 2026 तक संयुक्त निदेशक कृषि (ATC), कृषि आयुक्तालय को बीज उपलब्ध करवा सकती हैं। जिन हाइब्रिड्स का लगातार दो वर्षों तक परीक्षण हो चुका है, उन्हें अतिरिक्त परीक्षण से छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर जैसे पश्चिमी जिलों में सफेद मक्खी और कॉटन लीफ कर्ल वायरस (CLCuD) के प्रति संवेदनशील हाइब्रिड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि फसलों को रोगों से बचाया जा सके।

किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए सभी बीज कंपनियाँ कृषि विभाग के सहयोग से त्रि-स्तरीय प्रशिक्षण देंगी, जिसमें बुवाई-पूर्व, फसल-वृद्धि और कटाई के चरण शामिल होंगे। इसके तहत रिफ्यूज बीज के निर्धारित अनुपात, उर्वरक प्रबंधन, जैव नियंत्रण तकनीकों और अन्य कृषि पद्धतियों की जानकारी हिंदी में बीज पैकेट के साथ उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

आयुक्त ने बताया कि बीजों की बिक्री केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम-अधिकतम दरों के भीतर ही की जाएगी। प्रत्येक बीज पैकेट पर सत्यापन के लिए क्यूआर कोड और वैध संपर्क नंबर अंकित करना अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा कंपनियों को जिला-वार बिक्री योजना, डीलर सूची तथा पखवाड़े-वार बिक्री रिपोर्ट कृषि विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

राज्य सरकार ने बीज आपूर्ति में सहकारी क्षेत्र (KVSS, GSS, FPOs) को 15 से 20 प्रतिशत प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को बीज आसानी से उपलब्ध हो सके। इसके लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग और कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।बीजों की बिक्री के बाद बीटी कपास की निगरानी क्षेत्रीय एवं विभागीय एटीसी समितियों द्वारा की जाएगी, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में नीतिगत निर्णय लिए जाएंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश