मौसमी बीमारियों को लेकर अलर्ट: चिकित्सा मंत्री ने दिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश
जयपुर, 29 जुलाई (हि.स.)। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और स्क्रब टाइफस सहित मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, चिकित्सक एवं फील्ड में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी सक्रिय रहकर आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करें।
स्वास्थ्य भवन में बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में चिकित्सा मंत्री ने मौसमी बीमारियों की स्थिति, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा संस्थानों में उपकरणों, जांच सुविधाओं और दवाइयों की उपलब्धता की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी चिकित्सा भवनों का रिपेयर एवं मेंटेनेंस समय पर पूरा किया जाए और जर्जर भवनों के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मरम्मत कार्य में लापरवाही होने पर संबंधित चिकित्सा अधिकारी, संयुक्त निदेशक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
खींवसर ने कहा कि प्रदेश की सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट और ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक चिकित्सकों की नियुक्ति आगामी एक माह में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रत्येक चिकित्सा संस्थान में आवश्यक जांच सुविधाएं, दवाइयों की उपलब्धता तथा चिकित्सा उपकरणों की कार्यशीलता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही निःशुल्क जांच सेवाओं के तहत हब एंड स्पोक मॉडल में मरीजों को 24 घंटे के भीतर व्हाट्सएप पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने पर जोर दिया। जिन अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा नहीं है, वहां पीपीपी मॉडल के तहत सेवाएं शुरू करने के निर्देश भी दिए।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशभर में 38 हजार से अधिक चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति कर चुकी है तथा शेष पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने मरीजों की संख्या के अनुसार चिकित्सकों और स्टाफ की तैनाती करने तथा अस्पतालों में एक ही पद पर एक से अधिक कार्मिक नहीं रखने के निर्देश दिए। अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे सुचारु रखने और जहां कैमरे नहीं हैं, वहां तत्काल स्थापना करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए खींवसर ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित जांच, निगरानी और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के सभी डिलीवरी प्वाइंट्स पर स्त्री रोग विशेषज्ञों की मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञों द्वारा मेंटरिंग शुरू कर दी गई है। उन्होंने रेफरल व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा प्रसव सखी कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।
बैठक में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, आरएमएससीएल के प्रबंध निदेशक पुखराज सैन, अतिरिक्त मिशन निदेशक डॉ. टी. शुभमंगला, आरसीएच निदेशक डॉ. मधु रतेश्वर सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

