तुलसी के राम जन-जन के आराध्य राम : शास्त्री कौशलेंद्र दास
जयपुर, 27 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् जयपुर की ओर से बुधवार को पाथेय कण भवन में तुलसी जयंती समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जयपुर के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, चिंतकों और पत्रकारों ने भाग लेकर गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य, भक्ति परंपरा और उनके काव्य में निहित लोकमंगल की भावना पर विचार व्यक्त किए।
परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि भारतीय जनमानस में श्रीराम की उपस्थिति जीवन से मृत्यु तक बनी हुई है। कवि तुलसीदास ने प्रभु श्रीराम के विराट व्यक्तित्व को अपने काव्य का केंद्र बनाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिवार विघटन जैसी विकट समस्या के बीच तुलसीदास का साहित्य कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, सेवा, समर्पण, त्याग और उचित आचरण की प्रेरणा देता है।
प्रो. सत्यनारायण शर्मा ने तुलसीदास के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर विचार रखते हुए उन्हें भारतीय संस्कृति का रक्षक बताया और उनके जीवन एवं साहित्य से जुड़े विभिन्न दृष्टांत प्रस्तुत किए।
परिषद् की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं ‘साहित्य परिक्रमा’ के संपादक डॉ. इन्दु शेखर तत्पुरुष ने कहा कि तुलसीदास ने कवि और भक्त के रूप में जो श्रेष्ठ प्रतिमान स्थापित किए, वे आज भी समाज के लिए आदर्श हैं। उन्होंने अपने काव्य में समन्वय भाव के माध्यम से भारतीय एकता की विराट चेतना को अभिव्यक्त किया। रामराज्य की परिकल्पना को भी उन्होंने भारतीय चिंतन में प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर के दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष शास्त्री कौशलेंद्र दास ने भक्ति साहित्य और रामभक्त परंपरा पर विस्तृत विचार रखे।
उन्होंने तुलसीदास की गुरु परंपरा और उनके काव्य के महात्म्य को रेखांकित करते हुए कहा कि तुलसी की भक्ति में विनम्रता और काव्य में लोकमंगल की भावना उन्हें संसार के श्रेष्ठ कवियों में स्थान दिलाती है। उन्होंने कहा कि कवि तुलसीदास के राम जन-जन के आराध्य राम हैं। उनके राम में जाति, संप्रदाय और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। इस दृष्टि से तुलसीदास सही अर्थों में संपूर्ण समाज और मानवता के कवि हैं।
समारोह में हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नंद किशोर पाण्डेय, डॉ. मधु मुकुल चतुर्वेदी, इंद्र कुमार भंसाली, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, सौभाग्य कंवर, कुसुम शर्मा ‘अदिति’, परिषद् के प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. केशव शर्मा, जयपुर कार्यकारिणी के मधुसूदन सिंह देवल, डॉ. नमिता चौहान, डॉ. अंशुमान शर्मा तथा तुलसी मानस संस्थान के प्रो. संतु अर्थशास्त्री सहित अनेक साहित्यकार एवं विद्वान उपस्थित रहे।
अतिथियों का स्वागत डॉ. केशव शर्मा और डॉ. ओम प्रकाश भार्गव ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेवंत दान ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन परिषद् की जयपुर जिला इकाई के अध्यक्ष घनश्याम सिंह देवल ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

